जिले में 424 टीम करेगी टीबी के एक्टिव रोगियों की खोज, आशा देंगी अपना योगदान

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  • 31 जनवरी तक चलेगा अभियान
  • सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में होगा सैंपल कलेक्शन
  • ईट भट्ठा व महादलित बस्तियों में होगा विशेष नजर

सिवान: जिले में टीबी के एक्टिव मरीजों की खोज की जाएगी। एक्टिव केस खोज के कार्यक्रम में विशेष तौर पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र , महादलित टोला एवं वैसे लक्षित स्थल जहां पर मरीज मिल सकते हैं । वहां से सैंपल कलेक्शन करके एवं जांच के उपरांत पॉजिटिव पाए जाने पर ससमय इलाज शुरू करना और साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये का लाभ देना है। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी संचारी रोग डॉ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि पूरे जिले में टीबी मरीजों की खोज के लिए आशा एवं एवं सामुदायिक कार्यकर्ता की 424 टीम काम करेगी। संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि विशेष रूप से महादलित टोला, दुरुस्थ ग्रामीण क्षेत्र, शहरी दलित मलिन बस्ती, नवनिर्मित कार्यस्थल के मजदूर एवं ईंट भट्ठा के मजदूर लक्षित स्थान जहां संभावित टीबी के मरीज मिल सकते हैं। उस क्षेत्र में घर-घर जाकर एवं कैंप कर मरीजों का बलगम संग्रह करने के बाद जांच व टीबी चिह्नित होने पर समय पर इलाज शुरू करना एवं निश्चय योजना के तहत ₹500 की राशि बैंक खाता के माध्यम से दी जाएगी।

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ये है टीबी का लक्षण:

  • लगातार तीन हफ्तों से खांसी का आना और आगे भी जारी रहना।
  • खांसी के साथ खून का आना।
  • छाती में दर्द और सांस का फूलना।
  • वजन का कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना।
  • शाम को बुखार का आना और ठण्ड लगना।
  • रात में पसीना आना।

टीबी की रोकथाम के लिए इन बातों रखें ख्याल:

संचारी रोग पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि क्षय रोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से शिशुओं के बैसिलस कैल्मेट-ग्यूरिन (बीसीजी) का टीकाकरण कराना चाहिए। बच्चों में यह 20 से ज्यादा संक्रमण होने का जोखिम कम करता है। सक्रिय मामलों के पता लगने पर उनका उचित उपचार किया जाना चाहिए। टीबी रोग का उपचार जितना जल्दी शुरू होगा उतनी जल्दी ही रोग से निदान मिलेगा। टीबी रोग से संक्रमित रोगी को खाँसते वक्त मुँह पर कपड़ा रखना चाहिए, और भीड़-भाड़ वाली जगह पर या बाहर कहीं भी नहीं थूकना चाहिए।

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साफ-सफाई के ध्यान रखने के साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखने से भी टीबी के संक्रमण से बचा जा सकता है। ताजे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैट युक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। अगर व्यक्ति की रोक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो भी टीबी रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है।

2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य:

सीडीओ डॉ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने देश से 2025 तक टीबी के उन्मूलन की तैयारी कर रखी है। इस और लगातार काम किए जा रहे हैं। टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान इसी का एक चरण है। इसके तहत टीबी के नए रोगियों की पहचान करना, उन्हें सरकारी दवाओं से जोड़ना मरीजों को ठीक करना और जागरूक करना लक्ष्य है।

मरीजों को मिलेंगे 500 रुपए:

टीवी एचआईवी समन्वयक दिलीप कुमार ने बताया कि नए मरीज मिलने के बाद उन्हें 500 रुपए प्रति माह सरकारी सहायता भी प्रदान की जाएगी। यह 500 रुपए पोषण युक्त भोजन के लिए दिया जाएगा। एक मरीज को 8 महीने तक दवा चलती है, इस 8 महीने तक प्रतिमाह पांच 500-500 रुपए दिए जाएंगे। मरीज के ठीक होने के बाद यह राशि बंद कर दी जाएगी।