6 करोड़ 90 करोड़ का डस्टबिन घोटाला जांच में पाया सही

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परवेज़ अख्तर/सिवान : नगर परिषद में डस्टबिन घोटाले की जांच मामले में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी की रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो गई है कि नगर परिषद के पूर्व सशक्त समिति सहित कार्यपालक पदाधिकारी की सहमति से खरीदे गए 5000 हजार डस्टबिन के कीमतों में हेरफेर कर छह करोड़ 90 लाख रुपये का घोटाला किया गया है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि आपूर्तिकर्ता को उपस्कर की आपूर्ति के पूर्व अग्रीम का भुगतान किया गया जो नियम के विरुद्ध है। जेम पोर्टल का उपलब्ध दर 12750 रुपया है नगर परिषद द्वारा निर्धारित 18700 रुपया प्रति डस्टबिन है। इस तरह प्रति डस्टबिन 5950 रुपया अधिक भुगतान हुआ। कुल 5000 डस्टबिन के लिए दो करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपया का अधिक भुगतान किया गया। वहीं जांच रिपोर्ट में इंतखाब अहमद द्वारा उपस्थित कोटेशन 4900 रुपया प्रति पिस बताया गया। जो नगर परिषद के निर्धारित दर रे 13800 रुपया अधिक है। इस तरह से छह करोड़ 90 लाख रुपये का घोटाला किया गया। जांच कर रही टीम ने तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी आरके लाल सहित सशक्त कमेटी के सदस्यों पर कार्रवाई करने की संपुष्टि की है। इधर मामले में इंतखाब अहमद ने बताया कि वे इस जांच रिपोर्ट को हाई कोर्ट में दायर करेंगे और निगरानी से दोषियों की संपत्ति की जांच कराने की मांग करेंगे। बताते चले कि एलईडी घोटाला, हाईमास्क लाइट, डस्टबिन सहित अन्य घोटालों के समय सशक्त कमेटी में जो सदस्य थे उनमें से कई मौजूदा सशक्त कमेटी के सदस्य भी हैं। वार्ड नंबर 13 की पार्षद रंजना श्रीवास्वत पहले की अनुराधा गुप्ता वाली सशक्त समिति में थीं और अब सिंधु सिंह की सशक्त कमेटी में भी शामिल हैं।