मजबूत इच्छाशक्ति से किडनी व लीवर के मरीज होने के बावजूद 66 वर्षीय डॉ श्यामल किशोर ने दिया कोरोना को मात

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  • आईएलबीएस हॉस्पिटल दिल्ली में हुआ इलाज
  • गंभीर स्थिति होने के बावजूद भी काम नहीं हुआ हौसला
  • पुत्र के संपर्क में आने से हुए थे कोरोना पॉजिटिव
  • सिवान के सदर में चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर तैनात

सिवान: कहते हैं जिंदगी जीने का जज्बा हो तो आदमी के सामने बड़ी से बड़ी बीमारी घुटने टेक देती है। 66 वर्षीय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्यामल किशोर कोरोना को मात देकर ऐसा ही कुछ कर दिखाया है। लीवर व किडनी के मरीज होने के बावजूद भी छपरा शहर के पंकज सिनेमा रोड निवासी सिवान के सदर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्यामल किशोर कोरोना से जंग जीत कर अपने घर लौट आए हैं। दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल से कोरोना का इलाज करा कर लौटे हैं। डॉ श्यामल किशोर ने बताया कि एक दिन उनके बेटे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सर्दी खांसी और सांस लेने में समस्या थी, जिसका इलाज व खुद कर रहे थे। इलाज के दौरान उन्हें आभास हो गया कि उनके पुत्र को कोरोना हो गया है। जिसके बाद उनको लेकर पटना के एनएमसीएच में भर्ती कराया गया। जहां पर उनका इलाज किया गया। उसके बाद डॉक्टर श्यामल किशोर की तबीयत भी अचानक खराब हो गई। जिसके बाद वह दिल्ली चले गए और वहां पर जांच में पता चला कि वह भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। दिल्ली के आईएलबीएस हॉस्पिटल में उनका एडमिट कराया गया जहां पर 25 दिनों तक उनका इलाज किया गया। उनकी हालत काफी गंभीर थी। 25 दिनों के बाद उनकी कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आई और उन्हें 26 अगस्त को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

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हो चुका है किडनी ट्रांसप्लांट

डॉ. श्यामल किशोर का कुछ वर्ष पहले किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है. साथ ही उन्हें लीवर की भी समस्या थी जिसका इलाज वह दिल्ली में करा रहे थे. इस बीच वह कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए. अधिक उम्र एवं गंभीर रोगों से ग्रसित होने के कारण कोरोना से जंग जीतना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति के बदौलत उन्होंने कोरोना को मात दे दिया है. वह अब पड़ोसियों को इससे बचने के लिए जागरूक करने में जुट गए हैं। लोगों को बार-बार हाथ धोने और इस आपदा काल में एक दूसरे से मेल-मुलाकात पर कुछ दिनों के लिए विराम लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

चिकित्सक भी हुए आश्चर्यचकित

66 वर्षीय डॉ श्यामल किशोर गंभीर बीमारियों से ग्रसित होने के बावजूद वह जब करोना को मात देकर स्वस्थ हुए तो उनका इलाज कर रहे डॉक्टर भी आश्चर्यचकित हो गए. चिकित्सकों ने इस विषय पर अधिक रिसर्च करने की बात भी कही है. उनके ईलाज में जुटे चिकित्सकों ने भी उनके किडनी और लीवर जैसे गंभीर बीमारियों से ग्रसित होने के बावजूद कोरोना से उबरने पर उनकी मजबूत इच्छा शक्ति की सराहना की है.

कोरोना से डरे नहीं डटकर करें मुकाबला

डॉ. श्यामल किशोर ने बताया कि कोरोना से लड़ने के लिए दृढ़ संकल्प और आत्मबल ऐसे हथियार हैं जिसके बल पर इस जंग को जीता जा सकता है। इस बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है। बचाव के लिए एहतियात भी जरूरी है। उनका कहना है कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती या इलाज की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक लोगों को जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे- जब बहुत जरूरी हो तभी बाहर जाएँ और इस दौरान मुंह और नाक को मास्क से अच्छी तरह ढककर रखें. साथ ही दूसरे से दो गज की दूरी से ही मिलें एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। इसके अलावा साबुन-पानी से हाथों को अच्छी तरह से धोते रहें । प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए खानपान पर भी ध्यान जरूर दें।

अफवाह एवं भ्रांतियों पर ध्यान नहीं देने की अपील

डॉ श्यामल किशोर ने आम जनों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना को लेकर अफवाहों व भ्रांतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। सोशल मीडिया पर फ़ैल रहे अफवाहों से दूर रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनके साथ तो कोई सामाजिक भेदभाव नहीं हुआ है। लेकिन इस तरह की ख़बरें सुनने को मिलती रहती है. यह एक मुश्किल दौर है एवं ऐसे समय में कोरोना उपचाराधीन एवं संक्रमितों से किसी भी तरह की मानसिक या भावनात्मक दूरी बनाने से बचने की जरूरत है.

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