गुजरात में काम कर रहे लोगों के परिजन चिंतित

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परवेज अख्तर/सिवान : गुजरात मे काम करने गए लोगों के साथ मारपीट की घटना और उन्हें गुजरात छोड़कर जाने की मिली धमकी को लेकर इनके परिजन काफी चिंतित हैं। मैरवा प्रखंड के एक ही गांव के दो दर्जन परिवार के युवक गुजरात में काम करते हैं। कई वहां सपरिवार रहते हैं। ऐसे में गुजरात की हालात पर उनके परिजनों की नजरें टिकी हैं। वे फोन पर संपर्क बनाए हुए हैं। कई ने फोन कर हालात देखते हुए वापस लौट आने की सलाह दी है। वहीं इनकी नजर बिहार के मुख्यमंत्री की तरफ भी लगी हुई है। गुजरात से बिहारियों के पलायन के बीच हमलावरों द्वारा मकान खाली कर बिहार लौट जाने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी है। मैरवा प्रखंड के चुपचुपवा के उगन मिश्रा, मनोज गोड़, दिलीप गोड़, गणेश गोड़, युगल गोड़, राजेश्वर गोड़,मदन गोड़, शिवलाल गोड़, धनंजय गोड़ समेत कई अन्य परिवार के साथ गुजरात के अहमदाबाद में रहते हैं। वह कई वर्षों से वहीं काम कर रहे हैं। इसके अलावा कबीरपुर और गुठनी के बेलौर के भी कई लोग सपरिवार गुजरात में रह कर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में बिहारियों के साथ हुई घटना को लेकर इनके परिजनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। वे लगातार फोन पर संपर्क बनाए हुए हैं। चुपचुपवा के उगन मिश्रा के पुत्र विकास मिश्र ने बताया कि उनकी बात फोन पर पिता से हुई है। वहां घरों के अंदर भय से सभी दुबके हुए हैं। दिन में काम करने नहीं जा रहे हैं। बाजार जाने के लिए एक साथ तीन-चार लोग निकल रहे हैं। वहीं मनोज गोड़ के भाई नारायण गोड़, शिव लाल गोड़ के भाई विनोद गोड़ गांव पर रहते हैं। गुजरात में हाल के दिनों में हुई घटनाएं को लेकर काफी चिंतित हैं। लगातार फोन कर किसी तरह उन्हें गांव वापस चले आने को की सलाह दे रहे हैं। उगन मिश्रा ने फोन पर बताया कि भय का वातावरण है। हालांकि गुजरात सरकार ने सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की है। घरों के आसपास पुलिस की तैनाती भी कर दी है। कई परिवार के लोग जामनगर में भी जाकर काम करते हैं। रमेश मिश्र ने अपने भाई को फोन कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि वहां स्थिति सामान्य है। फिर भी भय व्याप्त है। जामनगर में ही कपिल मुनि मिश्रा काम करते हैं। उन्होंने बताया कि स्थिति सामान्य है। पुलिस तैनात की गई है, लेकिन सभी भयभीत है। चार दिनों पहले गुजरात से कबीरपुर के चार युवक लौट कर आए हैं। उन्होंने बताया की ट्रेन में जगह मिलना मुश्किल है। किसी तरह वे गुजराती बोलकर और अपने को बंगाल का बता कर लौटे हैं।

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