BJP-JDU में सब ठीक है? जातिगत जनगणना पर RJD के करीब जा रहा जदयू? जानें ललन सिंह के जवाब

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पटना: बिहार की राजनीति लगातार तेजी से बदल रही है. इन सबके बीच राजनीतिक बयानबाजी ने संशय को और बढ़ा दिया है. JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि बिहार में सरकार 2025 तक चलेगी, क्योंकि मैंडेट 2025 तक का है. बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर मचे सियासी घमासान पर भी ललन सिंह ने पार्टी का रुख स्‍पष्‍ट किया है. बता दें कि जातिगत जनगणना को लेकर जदयू और राजद के करीब आने की खबरों ने हलचल मचा रखी है. दूसरी तरफ, इसी मसले पर भाजपा के रुख से जेडीयू में बेचैनी बढ़ गई है. जेडीयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ललन सिंह ने इन मुद्दों के साथ ही अन्‍य मसलों पर भी रुख स्‍पष्‍ट किया है.

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पढ़ें ललन सिंह से खास बातचीत के प्रमुख अंश-:

सवाल: बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर राजनीतिक हलचल बेहद तेज है. ऐसा क्‍यों?

जवाब: बिहार के सियासत में जातिगत जनगणना को लेकर कोई हलचल नहीं है. जातिगत जनगणना आज समय की मांग है और फ़िलहाल जातियों की स्थिति क्या है, इसकी जानकारी तो आनी ही चाहिए ताकि उसके हिसाब से विकास के कार्यक्रम तय किया जा सकें.

सवाल: क्या भाजपा जातिगत जनगणना के मुद्दे पर आपके साथ है? आपको उम्मीद है कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भाजपा आपके साथ रहेगी?

जवाब: जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भाजपा साथ रहती है कि नहीं यह उनको तय करना है. हम उनके प्रवक्ता नही हैं. इसके पहले सर्वदलीय बैठक में भाजपा तो साथ थी और प्रधानमंत्री से भी जब बिहार से सर्वदलीय टीम गई थी, तब भाजपा के सदस्य भी साथ थे.

सवाल: चर्चा है कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर RJD और JDU की नजदीकियां बढ़ रही हैं?

जवाब: इस मुद्दे पर नज़दीकी जैसी क्या बात है? नज़दीकी और दूरी क्या होती है? हम जिस मुद्दे को सही मानते हैं अगर राजद भी उसे सही मानती है तो नज़दीकी और दूरी की बात क्या है? अच्छा है न कि इस मुद्दे पर तमाम पार्टियाँ एक साथ हैं.

सवाल: तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार की बंद कमरे में मुलाक़ात हुई, जिसके बाद क़यास का बाज़ार गर्म है. इस मुलाक़ात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं?

जवाब: अगर किसी मुद्दे पर कोई मिलता है तो इसमें राजनीति की बात क्या है? तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष हैं और जातिगत जनगणना के मुद्दे पर मुलाक़ात करना चाहते थे और मुलाक़ात बंद कमरे में हुई तो इसमे राजनीति की बात क्या है. क्या उस वक़्त कमरे में किसी और का रहना ज़रूरी था. इसमें राजनीति की कोई बात नहीं है.