‘सहयोगी’ ने बढ़ाया हाथ, अनूप लाल को मिला जीवन का नया आधार

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  • गरीबों को मुख्य धारा से जोड़ने में सहयोगी संस्था निभा रही महत्वपूर्ण योगदान
  • संसाधनों की कमी अनूप लाल के लिए नहीं बनी बाधक
  • सब्जी बेचने के सपने को सहयोगी संस्था ने किया पूरा

कटिहार: गरीबी दूर करने के प्रयासों को लेकर सरकारी महकमा चाहे जितनी भी अपनी पीठ थपथपा ले, लेकिन आज भी समाज में वंचित एवं गरीब परिवार फूस की छत के नीचे ही बसर करते आपको दिख जाएंगे. वंचित एवं गरीब समुदाय के लोगों के पास संसाधनों की कमी एवं रोजगार के सिमित अवसर होने के कारण उनके सामने रोजगार के तौर पर मजदूरी के अलावा कोई और दूसरा विकल्प शेष नहीं बचता. विकास और प्रगति की बातें उन गरीबों के लिए महज मजाक बन जाती है, जब उनके सामने अपने पेट भरने की चुनौती खडी होती है. ऐसे दौर में सहयोगी संस्था इन वंचित एवं गरीब परिवारों के सामाजिक, आर्थिक एवं शारीरिक उत्थान में सहयोग कर रही है. सहयोगी संस्था के सहयोग का ही नतीजा है कि जिले के बाघमारा गाँव के 45 वर्षीय अनूप लाल इंट के भट्टे को छोड़कर आज सब्जी बेचने के सपने को साकार कर पाए हैं. उनके इस काम में उनके बेटे भी सहयोग कर रहे हैं और अच्छी आय सृजित कर पा रहे हैं.

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बैठक में शामिल होने से मिला सहयोग

अनूप लाल ने बताया सहयोगी संस्था द्वारा आयोजित बैठक में उन्हें शामिल होने का मौका मिला. बैठक में शामिल होने से पता चला कि सहयोगी संस्था उनके जैसे गरीबों के रोजगार को बेहतर करने में सहयोग करते हैं. इस पर उन्होंने सहयोगी संस्था से सब्जी बेचने के व्यवसाय को लेकर मदद माँगी. सहयोगी संस्था ने अनूप लाल की आर्थिक मदद की ताकि वह स्थानीय स्तर पर सब्जी की खरीदारी कर इसे बाजार में अच्छे दामों में बेच सके. अनूप लाल बताते हैं कि वह इंट के भट्टे पर कार्य करते थे एवं उनकी पत्नी अंजो देवी भी अपने परिवार के सहयोग करने के लिए पास के खेतों में काम करती थीं. लेकिन धीरे-धीरे उनकी सेहत बिगड़ने से वह कार्य करने में असमर्थ हो रहे थे. इसलिए उन्होंने सब्जी की खेती करने की बात सोची थी.

लौट आई है मुस्कान

अनूप लाल कहते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं थी कि वह सब्जी के व्यवसाय शुरू कर पाते. लेकिन आज सहयोगी के आर्थिक सहयोग से वह सब्जी के व्यवसाय कर रहे हैं एवं अच्छी आमदनी भी कमा रहे हैं. उन्होंने बताया वह मौसमी सब्जियों को उत्पादकों से तुलनात्मक रूप से सस्ते मूल्य पर खरीदते हैं और स्थानीय बाजारों में अधिक कीमतों पर बेचते हैं. अच्छी आमदनी करने के बाद उन्होंने सब्जियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए अपनी गाड़ी में ओवर-टॉप कवर भी लगाया है. उन्होंने बताया कि वह अपनी आय का प्रबंधन करते हैं जिससे वह अपने परिवार का सहयोग करने में सक्षम हो सके हैं. उन्होंने कहा कि अब उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है. वह अपने काम को साकार करने में सहयोगी संस्था को धन्यवाद देते कहते हैं कि आज उनके साथ उनका पूरा परिवार खुश एवं स्वस्थ है. साथ ही उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्य भी अब उचित पोषण सुनिश्चित करने के लिए अपने भोजन में ताजी सब्जियों का उपयोग करते हैं.

जिले के मनिहारी प्रखंड में चलाया जा रहा सुपोषण कार्यक्रम 

आईजीएसएसएस के सहयोग से जिले के मनिहारी ब्लॉक के विभिन्न गाँवों में सहयोगी संस्था द्वारा सुपोषण कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के तहत समुदाय के वंचित एवं बहिष्कृत समुदायों को लक्षित करते हुए प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता के साथ पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को सृजित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. यह कार्यक्रम गरीबों एवं वंचितों के लिए सहायक साबित हो रही है. सहयोगी संस्था ने पोषण, स्वास्थ्य और रोजगार की उनकी खराब स्थिति को दूर करने के लिए विभिन्न तरीकों को तैयार किया है. साथ ही विभिन्न हितधारकों के सहयोग के साथ वंचित समुदायों के भी बीच जागरूकता फैला रही है. इसके लिए स्थानीय संसाधनों के उपयोग के साथ आय सृजन के बारे में विशेषज्ञों के सहयोग से प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर चिन्हित समुदायों का कौशल विकास पर भी ध्यान दे रही है. बैठक एवं प्रशिक्षण के माध्यम से सहयोगी स्थानीय स्तर पर आसानी से उगने वाली फसलों अर्थात सब्जियों, मक्का, मखाना आदि के विषय में प्रतिभागियों के साथ विभिन्न चित्र साझा कर उन्हें जानकारी देती है. साथ ही कई प्रतिभागियों ने अपने स्वयं के व्यवसाय करने के लिए वांछित समर्थन के लिए संस्था के कार्यकर्ताओं से संपर्क भी स्थापित कर रहे हैं.