….और जब अचानक 2014 में अवध बिहारी चौधरी ने सांसद बनने पर किया था जोर आजमाइश, पार्टी की बेरुखी उन्हें भीतर तक आधात पहुंचाया

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स्पीकर के लिए 2020 में भी बने थे विपक्ष का उम्मीदवार

✍️परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ:
2014 में अवध बिहारी चौधरी ने सीवान लोकसभा सीट के लिए भी आरजेडी से टिकट मांगी थी.लेकिन उन्हें नहीं मिला. 2014 में लोकसभा का टिकट पार्टी ने उन्हें न देकर शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को दे दिया.पार्टी की यह बेरुखी उन्हें भीतर तक आधात पहुंचाया था. हालांकि उस चुनाव में हेना शहाब को भी हार का मुंह देखना पड़ा और ओम प्रकाश यादव के सिर जीत का सेहरा बंधा.

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स्पीकर के लिए 2020 में भी बने थे विपक्ष का उम्मीदवार

साल 2020 के विधानसभा में वो एक बार फिर आरजेडी के टिकट पर सीवान सीट से जीत कर विधायक बने. हालांकि सरकार उनकी पार्टी की नहीं बनी. सीएम नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ एनडीए गठबंधन की सरकार बनाई और आरजेडी विपक्ष में बैठी. जब नई सरकार में विधानसभा अध्यक्ष के पद के लिए एनडीए ने बीजेपी के विजय सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया तो महागठबंधन की ओर से अवध बिहार चौधरी इस पद पर उम्मीदवार बने थे,लेकिन जीत विजय कुमार सिन्हा ने हासिल की थी और अवध बिहार विधानसभा अध्यक्ष नहीं बन पाए थे.अब जब दोबारा महागठबंधन सरकार सत्ता में आई तो विधानसभा अध्यक्ष के लिए आरजेडी ने अवध बिहार चौधरी को ही इस पद के लिए बेहतर समझा और आज उनको निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष भी चुन लिया गया.क्योंकि विपक्ष की ओर से इस पद पर कोई उम्मीदवार नहीं था.शुक्रवार को जब बिहार विधानसभा में स्पीकर के तौर पर आरजेडी से विधायक अवध बिहारी चौधरी को चुन लिया गया तो सीएम नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने नए अध्यक्ष का हाथ पकड़कर कुर्सी तक पहुंचाया और बैठाकर सदन की मर्यादाओं क निर्वह्न किया. आज जिला अपने लाला की इस कामयाबी पर गौरन्वित है.