बड़हरिया: शाह रमजान चिश्ती के मजार पर उमड़ी जायरीन की भीड़, रातभर मगन रहे अकीदतमंद

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  • कुल की रस्म में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़
  • नातिया कलाम पर रातभर झूमते रहे मुरीद

परवेज अख्तर/सिवान: जिले के बड़हरिया प्रखंड के पट्टी भलुआं स्थित शाह रमजान चिश्ती के मजार पर शुक्रवार की सुबह से रातभर जायरीनों की भीड़ उमड़ती रही, समां बंधा रहा. कुल की रस्म में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी.कुरानी ख्वानी व चादरपोशी हुई.अपने पीर के लिए मुरीदों व अकीदतमंदों का दीवानापन देखा गया. काफी संख्या में अकीदतमंदों ने कुल में शरीक होकर खिराज-ए-अकीदत पेश की.कुल की रस्म में महिला व बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. मुल्क में अमन चैन व कौम की सलामती की दुआएं मांगी गयी. कोलकाता से आये मो सलीम शाह चिश्ती ने बताया कि हम ख्वाजा गरीब नवाज चिश्ती के सिलसिले हैं.यह धर्मनिरपेक्षता, इंसानियत व भाईचारे का सिलसिला है.उन्होंने कहा कि-””ये हिंदू वो मुस्लिम की तफरीक है लाहासिल, ये यार के जलवे है.

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अपना हो या बेगाना.”” उन्होंने बताया कि हजरत रमजान शाह चिश्ती का हुजरा(आध्यात्मिक केंद्र) कोलकाता के पार्क सर्कस के कराया रोड में है व यहां उनका मजार है,जहां हरेक साल सात शबान को उर्स का आयोजन होता है. शुक्रवार की रात में समां महफिल में विश्वजीत दास, माधव घोषाल, गणेश नायक, अभिजीत दास, मो. अब्बास, छबि घोष, बुला घोषाल सहित दीगर आलिमों ने नातिया कलाम, सूफियाना गजल ओ-मनकवत का नजराना पेश किया. फनकारों ने अपने बेहतरीन कलामों का मुजाहरा किया. जिनको सुनकर श्रोता झूमने पर मजबूर हो गये. ””पूंछेगे सभी हस्र में सरकार कहां, सरकार पूछेंगे गुनहगार कहां.”” इस मौके पर मंसूर आलम,शमीम अहमद टुन्ना, मंजूर आलम, दाउद अहमद, रशीद अहमद सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद थे.