मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ राहत शिविर का लिया जायजा, अधिकारियों को दिए कई निर्देश

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पटना: बिहार के 26 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. जहाँ कई इलाके पूरी तरह जलमग्न है. सरकारी राहत के बावजूद लोगों को कहीं आने जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीँ गंगा नदी के किनारे बसे 12 जिलों में स्थिति और अधिक दयनीय है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा ले रहे हैं।

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आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाढ़ प्रभावित इलाकों के हवाई सर्वेक्षण के पश्चात मोहिउद्दीन नगर, समस्तीपुर में टाउन हॉल आपदा राहत केंद्र, जे.टी.ए. कॉलेज मोहिउद्दीन नगर आपदा राहत केंद्र और आईटीआई मोहिउद्दीन नगर पशु राहत शिविर का निरीक्षण किया. उन्होंने लोगों से मिलकर बातचीत की. साथ ही राहत कार्य को सुचारू रूप से चलाने के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया।

जे0टी0ए0 कॉलेज एवं टाउन हॉल, बलुआही में बने बाढ़ राहत शिविर के निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कोविड-19 वैक्सीनेशन केंद्र, बाढ़ प्रभावित गर्भवती महिलाओं का आश्रय स्थल, रसोई घर, भोजन मेनू, सफाई समिति, भोजनालय समिति, कोविड-19 जाँच सेंटर, बाल विकास परियोजना मोहिउद्दीननगर द्वारा प्रभावित परिवारों के बच्चों को पढ़ने हेतु विशेष पाठशाला की सुविधा, समुदायिक रसोई सहित बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत शिविर में दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ राहत शिविर में रह रहे लोगों से सामुदायिक रसोई में मिलने वाले भोजन एवं उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के संबंध में पूरी जानकारी ली। बाढ़ राहत शिविर में आवासित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं से भी अवगत हुए। मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं के आश्रय स्थल में श्रीमती रीता देवी को बाढ़ राहत शिविर में पुत्र पैदा होने पर राज्य सरकार की तरफ से उन्हें आर्थिक मदद स्वरूप 10 हजार रुपये का चेक प्रदान किया।

निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ राहत शिविर में आवासित हर व्यक्ति की कोरोना जांच और वैक्सीनेशन का प्रबंधन ठीक ढंग से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत शिविर में रह रहे लोगों को असुविधा न हो। इसका

विशेष रूप से ध्यान रखने की जरूरत है। वही पशु राहत शिविर का निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुओं के चारे एवं उनके स्वास्थ्य का भी विशेष रूप से ख्याल रखने की जरूरत है। इसके साथ ही यहाँ रह रहे पशुपालकों के भोजन, आवासन, स्वास्थ्य, निरंतर साफ-सफाई का भी पुख्ता प्रबंध होना चाहिए।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा की तीन दिन पहले ही हमने यहां आने का निर्णय लिया था. यह जगह भी बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित है. उन्होंने फिर कहा की सरकार के खजाने पर सबसे पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है. इसके मद्दनेजर उनके लिए काम किया जा रहा है।

वहीँ उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा की बाढ़ में पहले कहाँ कुछ होता था. बाढ़ के बारे में लोग जानते भी नहीं थे. इसके लिए कोई नियम भी नहीं बना था. सबकुछ हमलोगों ने 2007 से किया है।