कोरोना वायरस महामारी: मूअला पर दूध भात, जीअता पर……!!

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जून पर बूंद, बेजून पर घड़ा……..!

गरीबों के लिए सरकार के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी आगे आने की जरूरत है..!

भुखमरी के दौर में अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों को तलाश रही है गरीब व निरीह जनता

परवेज़ अख्तर/सिवान:- मूअला पर दूध भात,जीअता पर…..! यह कहानी उस समय संपूर्ण जिले में चरितार्थ होने लगी कि जब इस कोरोना वायरस जैसी महामारी के दौर में सिवान जिले के संपूर्ण हिस्सों में स्थानिय जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकार का फरमान आते ही उनके द्वारा खूब जोर शोर से साबुन और मास्क का वितरण की जाने लगी। वितरण के समय कई गरीब व असहाय लोग देखकर हैरत में पड़ गए।और उनके मुख से यह हृदय विदारक आवाज निकलने लगी कि इस कोरोना वायरस जैसे महामारी के दौर में हम सभी गरीब व निरीह जनता भूखमरी का शिकार हो रहे हैं।लॉक डाउन की स्थिति में हम सभी सरकार के दिशा निर्देश का अनुपालन करते हुए अपने – अपने घरों में कैद हैं।आए दिन टीवी और चैनलों पर सरकार का फरमान आता है कि कोई भी गरीब व निरिह जनता भूखमरी का शिकार नही होगा।यहां तक कि कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी यह बात का ऐलान सोशल मीडिया पर खूब करते हुए नजर आ रहे हैं कि हमारे पंचायत के गरीब लोग अनाज (राशन)के बगैर नहीं मरेंगे लेकिन उपरोक्त बातें अभी तक सिर्फ सोशल मीडिया व टीवी चैनलों पर ही सिमट कर रह गई।लेकिन इसको सच करने के लिए किसी जनप्रतिनिधियों द्वारा अभी तक कोई ऐसा पहल नहीं किया।कि सोशल मीडिया पर वाहवाही या सच को धरातल पर उतारे।जिससे गरीब व निरिह जनता अपना जीवन यापन करने में आसानी महसूस करे।

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यहां बताते चलें कि सरकार द्वारा कोरोना वायरस जैसी महामारी को रोकने के लिए प्रचार प्रसार से लेकर साबुन और मास्क का वितरण करवा रही है।ताकि लोग इस कोरोना वायरस जैसे महामारी से बच सकें। केंद्र सरकार के दिशा निर्देश के आलोक में बिहार सरकार भी उनके आदेश का अनुपालन करने में पीछे नहीं हट रही है।बिहार सरकार के दिशा निर्देश के आलोक में संपूर्ण जिले के प्रशासनिक पदाधिकारी से लेकर पुलिस पदाधिकारी भी सजग हैं। प्रशासन की गाड़ियां सड़कों पर सरपट सरपट दौड़ रही है।और आम जनमानस से यह आगाह भी कर रही है कि आप सभी अपने-अपने घरों में रहें,तब सुरक्षित रहेंगे। यहां बताते चलें कि हमारे संवाददाता ने जब जिले के अलग-अलग पंचायत के अलग-अलग हिस्सों में दौरा किया तो बहुत ही आंशिक लोगों से हमारे संवाददाताओं की मुलाकात हुई। जिसमें अधिकांश गरीब व निरिह जनता शामिल थे।हमारे संवाददाता द्वारा उनसे पूछा गया कि इस कोरोना वायरस जैसी महामारी में आप लोगों का बयान क्या है?तो कई गरीब व निरिह जनता फूट फूट कर रो पड़े और सरकार तथा जिला प्रशासन की प्रशंसा करने में तो पीछे नहीं हटे।लेकिन उनके मुख से बार-बार यह आवाज आ रही थी कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतर पा रही है आखिर क्यों ? दूसरी तरफ गरीब व निरिह जनता रो रो कर कहने लगी कि जब चुनाव का समय आता है तो वोट लेने के लिए लोग दरवाजे तक चले आते हैं।और उनके द्वारा बोला जाता है कि आप हमें अपना एक-एक बहुमूल्य वोट दें, मैं आपके कदम से कदम मिलाकर चलूंगा। लेकिन इस कोरोना वायरस जैसे महामारी के दौर में उनका कोई अता पता तक नहीं चल पा रहा है।कि जिनको हमने वोट देकर प्रखंड स्तर तक भेजा, जिनको हमने वोट देकर विधानसभा स्तर तक भेजा ,जिनको हमने वोट देकर हमने संसद भवन तक भेजा। हम लोगों के द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि आखिर कहां चले गए ?अभी तक कोई उनका अता पता तक नहीं चल पा रहा है। आम जनमानस के मुख से सिर्फ यही आवाज निकल रही थी कि “उन्हें धरती निगल गई ?या आसमां खा गया “? गरीब व निरिह ,आम जनमानस का यह कहना था कि इस महामारी के दौर में सरकार तो हम लोगों की मदद करने में पीछे नहीं है। लेकिन हम लोगों द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को भी इस महामारी के दौर में आगे आने की जरूरत है।ताकि चुनाव के समय में उनके द्वारा किए गए वादे सटीक हो जाते।लोगों ने कहा कि “जून पर बूंद, बेजून पर घड़ा”।से क्या फायदा होगा।बहरहाल चाहे जो हो उपरोक्त तथ्यों पर विचार अगर संपूर्ण जिले के अलग-अलग हिस्सों में चुने हुए जनप्रतिनिधि इस तथ्य पर अपना ध्यान आकृष्ट किए।तो इस महामारी के दौर में जो हालात गरीबों के बीच गुजर रहे हैं।उससे छुटकारा तो नहीं मिल पाएगी लेकिन वह गरीब लोग हम लोगों के बीच जीवित तो जरूर रह जाएंगे।