“दही चूड़ा राज के, वोट द सुराज के” का हो सकता है खेल

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nasima khatun

नसीमा को बहुरूपियों के रंग को भांप-भांप कर चलना होगा

हाल : पचरुखी प्रखंड का

परवेज़ अख्तर/सीवान:- “दही चूड़ा राज के, वोट द सुराज के”यह उक्त पंक्तियाँ जरा सुनने में आपको जरूर अटपटा सा लगता होगा।लेकिन यह पंक्ति कहीं चरितार्थ न कर बैठे हाल के गंवई राजनीत में चढ़ा पारा पे ?बतादें की जिले के पचरुखी प्रखंड प्रमुख नसीमा खातून के खिलाफ बृहस्पतिवार को बिन्दुसार पंचायत की चर्चित बीडीसी सदस्य शाहनाज खातून ने अविस्वास प्रस्ताव लगा दिया। अविस्वास प्रस्ताव आने के बाद इलाके में विरोधी गुट के लोग नसीमा को उखाड़ फेंकने के लिये तरह-तरह के तरकीब अपना रहे है।सूत्र ये भी बता रहे है की कुछ बीडीसी सदस्य नसीमा से साथ-साथ रहकर उनकी हरेक गतिविधि को भांप रहे है।वे उनके साथ ऐसे रह रहे है की जैसे इसे यूँ कहा जा सकता है की “गईए में साढ़ बा ,चिन्हात नईखे “। बहरूपिया बनकर उनके साथ रह रहे लोगों की जुबान से कहीं-कहीं यह बात भी निकल रही है की “दही चूड़ा राज के वोट द सुराज के” इस उक्त पंक्ति को अगर सहेज कर देखा जाये तो बहुत ही कठिन है डगर पन-घट की।उधर नसीमा के खिलाफ आये अविस्वास प्रस्ताव के मद्देनजर गंवई राजनीती में चहलकदमी दिन पे दिन बढ़ती जा रही है।बिरोधी गुट के लोग नसीमा को पटखनी देने में बारीकी पूर्वक कई विधि अपना रहे है।यहाँ बताते चले की प्रखंड में कुल 25 बीडीसी सदस्यों की सीट निर्धारित है। इसमें अविस्वास प्रस्ताव लाने के लिए केवल नौ बीडीसी की आवश्यकता थी। लेकिन बीडीसी शाहनाज खातून ने बिन्दुसार की बीडीसी कुन्ती देवी, पचरुखी पंचायत की शोभा देवी, भरतपुरा के अब्दुल कादिर, महुआरी की मालती देवी, उखई की रिंकु देवी, तरवारा की सुनीता देवी, शम्भोपुर की पूनम देवी, सरौती जयमाला देवी तथा तरवारा की बिदान्ती देवी के हस्ताक्षर वाला अविस्वास प्रस्ताव का आवेदन पत्र बीडीओ को सौंप दिया। इधर अविस्वास प्रस्ताव लगते ही पचरुखी प्रखंड इलाके में गंवई राजनिति तेज हो गई है।यहाँ गौर करें तो सबसे ज्यादा खतरा नसीमा को भीतरघात से हो सकता है।लेकिन नसीमा अपनी कुर्सी को हर हाल में अपने किये कामों के प्रति बचा लेने का दावा कर रही है।उधर विरोधी गुट के चर्चित बीडीसी सदस्य शाहनाज खातुन ने नसीमा का कोई जनाधार न होने की बात कह रही है।शाहनाज का कहना है की आने वाला समय ही बता पायेगा।बहरहाल चाहे जो हो अविस्वास प्रस्ताव आने के बाद दोनों गुट के लोग अपने-अपने चहेते बीडीसी सदस्य को कई विधि से अपनाने में लगे है।अब देखना है की ऊँट किस तरफ करवट लेता है।mahila prastav

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