ईद रोजेदारों के लिए मजदूरी मिलने का दिन : हाफिज शाहिद इमाम

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परवेज अख्तर/सिवान : पचरुखी के मंद्रापाली निवासी हाफिज शाहिद इमाम ने रमजानुल मुबारक पर फजिलत बयान करते हुए कहा कि हर चीज की जकात है लेकिन बदन की जकात रोजा है। इसलिए रोजे का एहतेमाम करें। आगे उन्होंने कहा कि इस महीने में अजरों सवाब बढ़ जाता है। नफील का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है। इस मुबारक महीना की खुशूशियत यह भी है कि अल्लाह ने इसमें कुरान पाक नाजिल फरमाया है तो हमें चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा कुरान की तिलावत करें और साथ ही इस माह में गरीबों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें।
दूसरी ओर उन्होंने कहा कि नबी. स.अ. का फरमान है कि माहे रमजान में घर वालों के खर्च में इजाफा करो, क्योंकि माहे रमजान में खर्च करना अल्लाह की राह में खर्च करने की तरह है। नबी स.अ. फरमाते हैं कि जिसने रमजान के एक दिन का रोजा बगैर मजबूरी नहीं रखा तो जमाना भर का रोजा भी उसकी कजा नहीं हो सकता। अगर वो बाद में रोजा रख भी ले, यानी वो फजीलत जो रमजान में रोजा रखने की थी अब उसे किसी तरह नहीं पा सकता। इसलिए हमें हरगिज गफलत का शिकार होकर रमजान का रोजा नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईद उन मुसलमानों के लिए है जिन्होंने माहे रमजान का रोजा रखा। तो ये ईद उनके लिए अल्लाह के तरफ से मजदूरी मिलने का दिन है। दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि ईद की नमाज अदा करने से पहले जकात व फितरा की अदायगी कर दें ताकि कमजोर व मिसकिन लोग भी ईद की तैयारी कर सकें और आपस में मिलकर गले लगाकर खुशी का इजहार करें। उन्होंने नमाजे तरावीह पर चर्चा करते हुए कहा कि नबी स.अ. ने फरमाया कि जो सख्श इमान और इकान के साथ रमजान की रातों में कयाम यानी तरावीह पढ़ेगा तो उसके पिछले तमाम गुनाह बख्श दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जन्नत में एक दरवाजा है जो रमजान के रोजेदारों के लिए है जिसका नाम बाबुर रइयान है यानी जो सही अदायगी के साथ रोजा रखेगा वह इसकी दरवाजे से जन्नत में दाखिल होगा। ऐसे तो जन्नत में आठ दरवाजे हैं जो रमजान के महीने में खोल दिए जाते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि रमजान के पूरे महीने में अर्श से फर्श तक रहमतों की लगातार बारिश होती है।