मायूसी:- धान की बालियों में हल्दिया रोग लगने से किसान चितित

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परवेज़ अख्तर/सिवान:
प्रखंड क्षेत्र में धान की बालियों में हल्दिया रोग लग जाने से किसान परेशान हैं। इस रोग में धान के बालियां पीले रंग की हो जाती हैं और उसके बाद काली हो जाती हैं। साथ ही अपने आस पास के खेत में यह रोग तेजी फैलना शुरू हो जाता है। प्रखंड क्षेत्र के केवटलिया गांव में लगभग एक सौ एकड़ भूमि में लगी धान की बालियों में रोग लग गया है। किसान राजकुमार ने बताया कि इस रोग को हल्दिया रोग है। उन्होंने बताया कि जिस धान की खेत में यह रोग लग रहा है उस धान की बालियां हल्दी के रंग की तरह एक दम पीला हो जा रही हैं। इसके बाद बालियां काली भी हो जा रही हैं। रोग लगने के बाद उन बालियों में दाना नहीं हो रहा है।

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केवटलिया गांव के किसान चंदन राय, जयभुवन राय, पप्पू राय, धनु राय, गुड्डू राय, चुनचुन राय, छोटे लाल राय, अमरेंद्र राय, मुन्ना राय, देवेश राय, संत कुमार राय, नीतीश राय, दिनेश राय, सुमित कुमार, शिवनाथ राय, सुभाष लाल, विक्कू राय सहित अन्य किसानों के करीब एक सौ एकड़ में लगी धान की फसल में यह रोग फैल चुका है। साथ ही प्रतिदिन यह रोग आसपास के खेतों में तेजी से फैल रहा है। इससे किसान परेशान व चितित हैं। इस रोग से किसानों के सभी मंसूबों पर पानी फिर रहा है। किसानों में मायूसी छा गई है। किसान राजकुमार कुशवाहा ने बताया कि हमलोग जब धान का बिचड़ा डाले तभी से ही भिन्न भिन्न मुसीबत से झेल रहे हैं।

धान के बिचड़ा को कीट पतंगों द्वारा खूब नुकसान किया गया। किसी तरह प्रतिदिन दवा का छिड़काव कर बिचड़ा को बचा धान की रोपाई की गई। अब धान की बालियां में रोग लग जाने से कमर ही टूट गई। कृषि समन्वयक राजेश कुमार ने बताया कि यह रोग पौधे में केवल बाली अवस्था में दिखाई देता है। केवल कुछ दाने ही इस रोग से प्रभावित होते हैं। बाली के बाकी दाने स्वस्थ रहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रोपीकोनाजोल तीन सौ एमएल प्रति एकड़ दर से 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें और कॉपर हाइड्रक्लोराइड व कोर्वेदाजिम व क्लोरोथानील दो एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इससे रोग से छुटकारा मिलेगा।

 

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