खत्म होगी फ़ाइलेरिया बीमारी, सरकार की पूरी तैयारी

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7 अगस्त से 14 दिनों तक 17 जिलों में घर-घर खिलाई जाएगी दवा

सीफार के सहयोग से आयोजित मीडिया कार्यशाला मे दी गयी जानकारी

दवा खाने वाले लोगों की उँगलियों पर होगी मर्किंग

पटना/ 5 अगस्त : फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए राज्य के 17 ज़िलों में 7 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम( एमडीए) की शुरुआती की जाएगी। सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के सहयोग से राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा सोमवार को शहर के एक होटल में मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। सीफार के राज्य प्रबंधक रणविजय कुमार द्वारा कार्यशाला का संचालन किया गया।
इस अवसर पर राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासकीय पदाधिकारी खालिद अरसद ने कहा कि सरकार के वर्ष 2020 तक फ़ाइलेरिया उन्मूलन के संकल्प को साकार करने के क्रम में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। इसको लेकर 2 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को फ़ाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी। गंभीर रोग से ग्रसित एवं गर्भवती महिला को छोड़कर सभी लोगों को दवा का सेवन कराना हैं। साल में एक बार खिलाई जाने वाली यह दवा यदि लगातार 5 साल तक सेवन की जाए तो फ़ाइलेरिया के संक्रमण को रोका जा सकता है।

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राज्य के 17 ज़िलों में एमडीए राउंड: राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी फाइलेरिया डॉ. राजनंदन प्रसाद ने बताया फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए राज्य के 17 ज़िलों में 7 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जाएगा। यह अभियान 14 दिनों तक चलाया जाएगा। जिसमें बेगुसराय, भागलपुर, बक्सर, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, गया, जहानाबाद, जमुई, कैमूर, पटना , खगड़िया, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, सारण, शेखपुरा, सिवान एवं सुपौल जिले को अभियान में शामिल किया गया है। श्रावणी मेला एवं बाढ़ के कारण राज्य के चिन्हित 24 ज़िलों की जगह 17 जिलों में ही एमडीए राउंड चलाने का निर्णय लिया गया है। इस कार्यक्रम के सफ़ल क्रियान्वयन में विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं पीसीआई के साथ जीविका, पंचायती राज, शिक्षा विभाग एवं आईएमए द्वारा जन-जागरूकता बढ़ाने में सहयोग किया जा रहा है।

फ़ाइलेरिया संक्रमण से बचाव के लिए दवा जरूरी : राज्य समन्वयक नेगलेकटेड ट्रोपिकल डीजीजेज़ विश्व स्वास्थ्य संगठन डॉ॰ राजेश पाण्डेय ने बताया बिहार के 38 जिले फ़ाइलेरिया से प्रभावित है। इसको ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वर्ष सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के तहत सभी पात्र लोगों को घर-घर जाकर फाइलेरिया की दवा खिलाई जाती है। लिम्फैटिक फाइलेरेसिस यानि हाथीपांव एक गंभीर सामुदायिक स्वास्थ्य समस्या है। इस रोग का प्रभाव बिहार सहित भारत के 16 राज्यों एवं 5 केंद्र शासित प्रदेशों में है। यह संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। यह एक दर्दनाक एवं मुश्किल से पकड़ में आने वाला रोग है, जिसके लक्षण सामने आने में वर्षों लग सकते हैं। यह एक गंभीर रोग है जिसके कारण शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है। आमतौर पर यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है। फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है।

ऐसे खिलानी है दवा: 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली दी जाएगी. साथ में सभी को एलबेंडाजोल की एक गोली खानी है। खाली पेट दवा का सेवन नहीं करना है।

बचाव एवं प्रबंधन: फ़ाइलेरिया दवा सेवन से फाइलेरिया संक्रमण का ख़तरा टल जाता है। फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों का ईलाज मोरबिडिटी एवं डिसएबिलिटी प्रबंधन के तहत किया जाता है। लिंफोइडिमा एवं हायड्रोसिल के ईलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर आवश्यक सुविधा उपलब्ध करायी गयी है।

ड्रूग एड्मिनिसट्रेटर को प्रोत्साहन राशि : कार्यक्रम के बेहतर संचालन के लिए दो ड्रूग एड्मिनिसट्रेटरों की एक टीम बनाई गयी है जिसमें प्रत्येक टीम में दो आशाओं को शामिल किया गया है। दो ड्रूग एड्मिनिसट्रेटरों को अधिक से अधिक 400 घर या 2000 आबादी का दौरा कर लोगों को दवा खिलाने की ज़िम्मेदारी दी गयी है। साथ ही 50 घर या 250 लोगों को दवा खिलाने पर प्रति आशा 600 रुपए दिए जाएंगे। अभियान के पहले दिन से छठे दिन एवं आठवें दिन से तेरहवें दिन तक एक टीम 40 से 50 घरों का दौरा कर लक्षित लोगों को दवा खिलाई जाएगी। जबकि अभियान के 7 वें एवं 14 वें दिन छूटे हुए लोगों एवं घरों का दौरा कर लोगों को दवा खिलाई जाएगी।

घरों की होगी मार्किंग: एमडीए राउंड के दौरान सभी घरों के दौरे को सुनिश्चित करने के लिए सभी आशाएँ घरों पर मर्किंग भी करेंगी। जिसमें वह घर पर हाउस नंबर के साथ तारीख़ डालेंगी।

उँगलियों पर होगी मार्किंग: शत-प्रतिशत लक्षित समूह को दवा सेवन सुनिश्चित कराने के मकसद से इस बार के एमडीए कार्यक्रम में कुछ नए बदलाव किए गए हैं। अब पोलियो अभियान की तर्ज़ पर एमडीए कार्यक्रम के दौरान भी दवा सेवन करने वाले लोगों के बाएँ हाथ की तर्जनी नाखून के साथ त्वचा पर मर्किंग की जाएगी।

इस दौरान डॉ. रविशंकर सिंह क्षेत्रीय कार्यालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार , खालिद अरसद एड्मिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर राज्य स्वास्थ्य समिति, डॉ. अजय कुमार आईएमए, सौरभ शुक्ला राज्य कार्यक्रम प्रबंधक पीसीआई, सीफॉर से शशिधर द्विवेदी के साथ अन्य अधिकारी उपस्थित होकर कार्यक्रम से संबंधित जानकारी दी।