गोंडवाना समाज ने बलिदान दिवस के रूप में मनाई वीर नारायण सिंह की जयंती

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परवेज अख्तर/सिवान : स्थानीय सिसवन ढाला स्थित लक्ष्मीपुर स्थित रामलखन गोड़ के मकान में रविवार को आदिवासी समाज के लोगों द्वारा दारोगा साह गोड़ की अध्यक्षता में गोंडवाना साम्राज्य के सपूत राजा वीर नारायण सिंह का जन्मदिन बलिदान दिवस के रूप में मनाया। कार्यक्रम का संचालन बाल कुंवर साह ने किया। बतौर मुख्य अतिथि अशोक कुमार गोड़ ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके पदचिह्नों चलने का संकल्प लिया। शिक्षक नेता मंगल कुमार साह ने कहा कि वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, एक सच्चे देशभक्त एवं गरीबों के मसीहा थे। 17वीं सदी में सोनाखान राज्य की स्थापना की थी। इनके पूर्वज सारंगढ़ के जमींदार के वशंज थे। सोनाखान का प्राचीन नाम सिंघगढ़ था। राजा वीरनारायण सिंह प्रजा के हितैषी थे। इन्हें छल पूर्वक देशद्रोही एवं लुटेरा काबेबुनियाद आरोप लगा बंदी बना लिया गया और 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के चौराहे वर्तमान में जयस्तंभ चौक पर बांधकर इन्हें फांसी दी गई। बाद में उनके शव को तोप से उड़ा दिया गया मौजूद रहेंहैं । और इस तरह से भारत के एक सच्चे देशभक्त की जीवनलीला समाप्त हो गई। उल्लेखनीय है कि गोंडवाना के शेर कहे जाने वाले अमर शहीद वीरनारायण सिंह को राज्य का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा प्राप्त है। इनके सम्मान में फिलहाल प्रदेश शासन के आदि जाति कल्याण विभाग ने उनकी स्मृति में पुरस्कार की स्थापना की है। समारोह में भाग लेने वाले बंका प्रसाद गोड़,अमित कुमार गोड़, हिरालाल गोड़, भरत प्रसाद गोड़, मंटू गोड़, हरेंद्र प्रसाद गोड़, ुन्ना गोड़, शत्रुघ्न गोड़, राकेश गोड़, रवि कुमार गोड़, अमित कुमार, जितेंद्र गोड़, कनई गोड़, बलिराम साह, गौतम शाह, उमाशंकर शाह, मदन गोड़ आदि उपस्थित थे।

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