अनियंत्रित हाइवा की चपेट में आने से ठेला चालक की दर्ददनाक मौत, रोड जाम

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  • गोपालगंज का मजदूर सिवान में करता था ठेला चला कर जीवन यापन
  • परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल
  • दुर्घटना में शामिल हाइवा चालक समेत अन्य पुलिस हिरासत में

परवेज़ अख्तर/सिवान : जिले के मैरवा के मझौली चौक के समीप मंगलवार को एक अनियंत्रित हाइवा की चपेट में आने से ठेला चालक की दर्दनाक मौत मौके पर ही हो गई है। मृतक ठेला चालक की पहचान गोपालगंज जिले के मांझागढ़ थाना के देवापुर जाफ़र टोला गांव निवासी स्वर्गीय चंद्रिका साह के पुत्र मोगल साह(45 वर्ष)के रूप में की गई है। मृतक अपने परिवार का भरण पोषण के लिए सिवान जिले के मैरवा में लगभग 25 वर्षों से एक प्राइवेट क्वाटर लेकर मैरवा बाजार में ठेला चलाने का काम करता था कि इसी बीच सिवान के तरफ से मैरवा की ओर जा रही एक अनियंत्रित हाइवा के चपेट में आने से ठेला चालक की दर्दनाक मौत मौके पर ही हो गई।

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उधर घटना के बाद बाजार वासियों ने दुर्घटना में शामिल हाइवा समेत चालक व अन्य को पकड़कर पिटाई शुरू कर दी कि इसी बीच माले नेत्री सह जिला पार्षद सदस्य सोहिला गुप्ता को खबर मिली तो श्रीमती गुप्ता ने इसकी सूचना स्थानीय थाना को दी। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर चालक समेत अन्य को अपने हिरासत में लेकर शव को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया।

परंतु उत्तेजित बाजार वासियों ने पुलिस द्वारा शव उठाने से रोका गया।बाद में लोगों ने मृतक के परिजनों को मुआवजा हेतु मुख्य पथ को जाम कर नारेबाजी करने लगे। बाद में इसकी सूचना स्थानीय पुलिस ने प्रखंड तथा अंचल प्रशासन को दी। सूचना पाकर पहुंचे प्रखंड तथा अंचल प्रशासन ने उत्तेजित बाजार वासियों को समझा-बुझाकर मामला को शांत कराया। बाद में पुलिस ने पंचनामा के आधार पर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल भेज दिया।

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मृतक के पत्नी का रोते-रोते बुरा हाल

सदर अस्पताल परिसर में मृतक की पत्नी रीमा देवी का रोते-रोते बुरा हाल हो चुका है। उसकी पत्नी रीमा देवी को क्या पता कि मेरे पति मुझे ठुकरा कर जिंदगी के उस दहलीज पर ले जाकर छोड़ देंगे जहां मेरी रिमझिम आंखों के आंसू ही सूख जाएंगे। मृतक के तीन पुत्रियों में क्रमशः प्रियंका कुमारी (20 वर्ष), करिश्मा कुमारी (13 वर्ष) तथा दामिनी कुमारी (11वर्ष) व दो पुत्रों में क्रमशः रवि कुमार( 21 वर्ष),सुमंत कुमार (11 वर्ष) है।सुमंत शरीर से विकलांग है।घटना के बाद अब परिजनों के बीच जीवन यापन को लेकर प्रश्न चिन्ह लग गया है? आखिर अब परिवार का भरण पोषण कौन करेगा? मृतक मोगल ही ठेला चला कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था अपने परिवार का मात्र वही एक कमाऊ सदस्य था।