फीडर रोड में जिला परिषद की जमीन पर अवैध कब्जा, लाखों रूपये की हर महीने होती है उगाही

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छपरा: मशरक सिदधात्री मंदिर से बाजार होते हुए पुराने रेलवे स्टेशन रोड तक की सड़क अवैध अतिक्रमणकारियों के कब्जे में हो गयी है।अतिक्रमणकारियों के चपेट में बाजार का मुख्य मार्ग वाहनों से जाम हो जाता है। वही आने जाने वालों को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है। बाजार क्षेत्र की सड़कें चौड़ी होने के बावजूद जिला परिषद की जमीन पर अतिक्रमण के कारण जाम लग जा रहा है। गौरतलब है कि जिला परिषद प्रशासन ने कुछ सालो पहले अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने का काम किया था। जिसपर जिला परिषद ने दुकान बनाने के नाम पर टेंडर निकाल कड़ोरो रूपये जमानत के नाम पर जमा कराया हैं पर कानूनी दांव-पेंच में दुकानों का निर्माण फसा हुआ है। लेकिन फिर से सड़क के किनारे जिला परिषद की जमीन पर अस्थाई दबंग दुकानदार द्वारा कब्जा कर सड़क किनारे तक दुकाने लगा ली हैं। सड़क किनारे लग रही दुकानों के सामान से प्रतिदिन सड़क जाम हो जा रही है।

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स्टेशन रोड के दुकानदार अपनी दुकानों के आगे निर्धारित सीमा से बाहर सड़क पर तक सामान रखने लगे हैं। ऐसे में सड़क पर चलने के लिये स्थान तो बचता है, लेकिन चौपहिया वाहन निकलने पर जाम के हालात बन जाते हैं। इतना ही नहीं यहां पहुंचने वाले लोग अपने वाहन दुकानों के आगे खड़ा करते हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों को भी आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ती है। मशरक स्टेशन फीडर रोड में तकरीबन एक हजार से अधिक दुकानें हैं जो बाजार की हदयस्थली है साथ ही दो बैंकों की शाखाएं भी हैं। लेकिन हैरानी इस बात की है कि इन बैंकों के सामने कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई है। वही जिला परिषद ने भी दो जगहों पर बड़े-बड़े मार्केट तो बना दिए लेकिन पार्किंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं किया गया है। इस कारण लोग अपनी बाइक व चार पहिए वाहन को सड़क किनारे ही खड़ा कर देते हैं। सड़क किनारे वाहनों के खड़े रहने से आए दिन जाम की समस्या बनी रहती है।

सड़क चौड़ीकरण और नाला निर्माण की मुख्य मांग हैं यहां

अतिक्रमण के कारण मशरक स्टेशन रोड संकीर्ण हो चला है। दोनों तरफ से सरकारी जमीन पर अगल बगल के लोगों ने कब्जा कर सड़क पर तक दुकानें लगा आम आदमी के पैदल चलने वाले रास्ते को भी पूरी तरह से अतिक्रमण कर वाहन खड़ी कर दी जाती है। हैरानी तो इस बात की है कि इस रास्ते हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं जिसमें कई वीआइपी और अधिकारी भी होते हैं। ऐसे में उनकी निगाहें भी इस ओर जाता होगा लेकिन वे भी इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं हो रहे हैं। आज हालात ऐसी बनी है कि लोग बेतरतीब तरीके से अपने दुकान के पांच से छह फीट बाहर दुकानें पसार कर बैठे गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने से इन लोगों का मनोबल काफी बढ़ गया है। वे लोग नीडर होकर अपने काम को अंजाम देते आ रहे हैं। आम जनता को क्या परेशानी है इससे किसी को कुछ लेना-देना नहीं है।वही जिला परिषद के जमीन के किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों ने नाला और सड़क निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर की थी जिसमें हाइकोर्ट ने भी सड़क नाला निर्माण करने का आदेश जारी किया था।पर जिला परिषद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से पीछे रहने वाले लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो गए हैं।

अरबों रुपए की जमीन है पर दबंग दुकानदार करतें हैं लाखों की अवैध उगाही

मशरक बाजार क्षेत्र में अरबों रुपये की संपत्ति जगह-जगह है, लेकिन परिषद को इस बारे में पता नहीं, क्योंकि लगभग सभी जगह अवैध कब्जा है। अपनी संपत्ति का पता लगाने के बारे में भी जिला पार्षद चुप्पी साधे हुए हैं। आज स्थिति यह है कि अरबों रुपये की संपत्ति होने के बाद भी मशरक में परिषद की‌ स्थिति कंगाल है। किराये के नाम पर कुछ दुकानों से ही कुछ हजार रुपये प्राप्त होते हैं।वही जिला परिषद के डाक-बंगला में बालविकास परियोजना कार्यालय का ऑफीस खुला है और चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा रहता है। जानकार बताते हैं कि कभी जिला परिषद का रूतबा हुआ करता था। जब तक चेयरमैन से लेकर पार्षद तक अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझेंगे तब तक बात नहीं बनेगी।