बिहार से यूपी को जोड़ने वाली स्याही पुल क्षतिग्रस्त, बड़े हादसे का संकेत

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कई बार पूल के नीचे जा चुकी है दर्जनों गाड़ियां

परवेज अख्तर/सिवान: बिहार से यूपी को जोड़ने वाली स्याही पुल के जर्जर होने से बड़े हादसे का संकेत दे रहा है. पूल का स्लेब पुरी तरह से जर्जर हो चुका है. इस पुल से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भारी व छोटे वाहन गुजरते हैं, जो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.. यही नहीं पुल के दोनों तरफ रेलिंग नहीं होने से आने जाने वाली वाहनों के चालक की धड़कने तेज हो जाती है. पुल की चौड़ाई कम होने से एक ही गाड़ी आती जाती है. पुल पर लोग जान को खतरे में डालकर आवागमन कर रहे हैं. वार्ड पार्षद रह चुकी रीमा सिंह ने पुल निर्माण के लिए पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव को पत्र लिखकर अवगत कराया था. बावजूद इसके निर्माण कार्य नहीं हुआ. जब उप चेयरमैन रीमा सिंह बनी तो वर्तमान सासंद कविता सिंह को पत्र लिखकर स्याही पुल के निर्माण कार्य कराने की मांग की थी. उसके बाद भी समस्या जस के तस बनी हुई है. यही नहीं पुल के ऊपर कई जगह का हिस्सा फैल गया है तथा लगें सीमेंट और कंक्रीट का प्लास्टर बाहर आ जाने से पुल में लगे सरिया जंग खा रहे है. वाहन चालक जान को खतरे में डालकर इस पुल से गुजरने को बाध्य हैं. स्थानीय डॉ शैलेश सिंह ने कहा कि पुल के पास से डायवर्जन दे देना चाहिए और जल्द से जल्द पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बढ़ी घटना घट सकती है.

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जंग लगी सरिया झेल रहा है भार

बिहार यूपी को जोड़ने वाली स्याही पुल झरही नदी पर स्तिथ है. पुल के 100 साल पूरे होने के बाद बुरी तरह जर्जर के अवस्था में आ गया है. पुल का पूरा स्ट्रक्चर जर्जर हो चुका है. लोहे पर बने पुल में पूरी तरह जंग लग चुका है. इसके साथ ही कई जगह गढ्ढा हो गया है. जब भी कोई वाहन आता जाता है तो पुल में कंपन होने लगता है. पुल के कभी भी टूटने की दहशत लोगों में रहता है.

रामपुर फैक्ट्री में गन्ने ले जाने के लिए बना था पुल

यूपी में गन्ना फैक्ट्री स्थापित हुआ था. तब स्याही पुल का निर्माण हुआ. इस पुल से बिहार से यूपी में गन्ना जाता है. व्यवसायिक दृष्टिकोण से इस पुल का बहुत अधिक महत्व है. इस मार्ग से आसानी से गोपालगंज जा सकते हैं. यही नहीं किसान अपनी सब्जी व फसल इसी मार्ग से लाकर बिहार में बेचने व खरीदने का कार्य करते हैं.