सिवान के जेडीयू सांसद ने पति व भौजाई संग मिलकर की खरना का विधि विधान

0
  • दुश्मन कितनों कमजोर हो जाए तो उसे कमजोर नहीं समझा जाता है: अजय सिंह
  • सांसद अपने पति व भौजाई संग मिलकर सिवान वासियों की सलामती के लिए छठी माई से की प्रार्थना

✍️परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ:
इस वर्ष छठ पूजा की शुरूआत 8 नवंबर 2021को नहाय-खाय के साथ शुरू हुई है. नहाय-खाय के बाद अगले दिन (9 नवंबर 2021) खरना था. इस पूजा में खरना का बहुत महत्व होता है.कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना मनाया जाता है. खरना में दिन भर व्रत के बाद व्रती रात को पूजा के बाद गुड़ से बनी खीर खाकर उसके बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करते हैं.इस लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के दरमियान सिवान लोकसभा सीट से जेडीयू सांसद श्रीमती कविता सिंह जो अपने पति व भौजाई संग मिलकर महत्वपूर्ण खरना का विधि-विधान कर सिवान वासियों के लिए छठी माई से सलामती के लिए  प्रार्थना की.उन्होंने इस दरमियान अपने सिवान वासियों से यह आह्वान करते हुए कहा कि सभी श्रद्धालु भक्तगण, देश में काल क्रूर बनकर आया,कोरोना से बचें,तथा सरकार द्वारा गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए इस पर्व को शांति सौहार्द के बीच मनाएं,उन्होंने सिवान समेत संपूर्ण बिहार वासियों को लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की शुभकामना देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की.वहीं जेडीयू के वरिष्ठ लीडर सह कमजोर तबके के लोगों के मसीहा श्री अजय सिंह ने लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा पर लोगों को शुभकामना देते हुए कहा कि अगर दुश्मन कितनों कमजोर हो जाए तो उसे कमजोर नहीं समझा जाता है,भले बिहार सरकार व केंद्र सरकार द्वारा एक अभियान के तहत करोना डोज को चलाकर देश में काल क्रूर बन कर आया कोरोना को भले ही कमजोर कर दिया गया है लेकिन अभी भी उससे बचने की जरूरत है. दुश्मन कभी कमजोर नहीं होता.

विज्ञापन
pervej akhtar siwan online
ahmadali
camp

खरना का क्या है महत्व

vidhi vidhan

छठ पर्व में इस दिन का विशेष महत्व होता है. नहाय-खाय वाले दिन घर को पवित्र कर व्रती अगले दिन की तैयारी करती हैं.जब खरना आता है तो सुबह व्रती स्नान ध्यान करके पूरे दिन का व्रत रखते हैं.इसी दौरान अगले दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए प्रसाद भी बनाया जाता है.शाम को पूजा के लिए गुड़ से बनी खीर बनाई जाती है.इस खीर को कुछ जगहों पर रसियाव भी कहते हैं. इस प्रसाद को मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से आग जलाकर बनाया जाता है.हालांकि शहरी इलाकों में मिट्टी के चूल्हे की उपलब्धता न हो पाने की स्थिति में कुछ लोग नए गैस चूल्हे पर भी इसे बनाते हैं.पर चूल्हा नया हो और अशुद्ध न हो इसका खास ध्यान रखा जाता.