कंगारु मदर केयर से जुलेखा की लाडली को मिला जीवनदान, आंगन में गूंज रही किलकारियां

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  • जुलेखा का आत्मविश्वास ने परिदृश्य को बदला, खुशियों से झूम उठा परिवार
  • छठे माह में ही घर पर हो गया जुलेखा का प्रसव
  • डॉक्टर ने कहा था- बच्ची को बचाना मुश्किल है, परिवार वाले नहीं माने हार
  • अब जुलेखा आंगन में गूंज रही है जैनम की किलकारियां

गोपालगंज: शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाए जा रहे है। इसी कड़ी में कमजोर नवजात शिशुओं व समय से पहले जन्मे शिशुओं का विशेष ख्याल रखा जा है। ममतामयी माता का आंचल निष्प्राण होते बच्चे के लिये जीवनदायनी बन जाता है। यह कोई कोरी कल्पना नही बल्कि इसे जिले की फुलवरिया प्रखंड के काजीपुर की जुलेखा ने साबित कर दिया गया है। नदीम हुसैन की पत्नी जुलेखा खातुन गर्भवती थी। जुलेखा खातुन का जांच समय समय पर प्रईवेट क्लीनिक गोपालगंज में परिवार द्वारा करवाया गया। चिकित्सकों ने जुलेखा खातुन को एस्टिमटेड डिलीवरी डेट 7 फरवरी, 2020 की दी थी। जुलेखा खातुन का जांच रिपोर्ट भी समान्य थी। जुलेखा खातुन ने समय से टीटी का इन्जेक्शन लगवाया एवं आईएफए की गोलियों का भी सेवन किया। जुलेखा खातुन खुश थी। आने वाले बच्चे के लिये सपने संजो रही थी। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक 27 अक्टूबर 2019 को जुलेखा खातुन को प्रसव पिड़ा होने लगी। घर वालो को लगा की यू ही किसी कारण दर्द हो रहा है क्योकि उनके दिमाग में था प्रसव तो फरवरी 2020 में होगा। अतः घर वाले इसके लिये तैयार नही थे। जुलेखा का गर्भावस्था के छठा महिना ही शुरु हो रहा था। इसलिए घरवालो द्वारा प्रसव के लिये अस्पताल जाने के बारे में सोचा ही नही गया और इसी उधेड़ बुन में जुलेखा खातुन का प्रसव घर पर ही हो गया। उन्होने घर पर ही एक अत्यंत कमजोर बच्ची को जन्म दिया । प्रसव छह माह पर ही हो गया एवं बच्ची अत्यधिक कमजोर थी।

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डॉक्टर ने कहा था- बच्ची को बचना मुश्किल है, परिवार वाले नहीं माने हार

घर वाले नवजात को लेकर एक निजी चिकित्सक के पास पहुंचे। परिवार के सदस्यो से डॉक्टर ने कहा कि यह प्रसव समय से बहुत पहले हो गया है एवं बच्ची बहुत ही कमजोर है। चिकित्सक ने बच्चे का अधिक कमजोर होने के कारण ईलाज करने से मना कर दिया एवं बताया बच्चे को इस स्थिति में बचाना मुश्किल है। चिकित्सक ने यहां तक कह कि बच्ची तीन से चार दिन तक ही जीवित रहेगी।

डॉक्टर की बात से जुलेखा एवं बच्चे की दादी अम्मा सितारा खातुन को सदमा सा लगा। वो बच्चे को वहा से उदास मन से घर ले आई। क्लीनिक से लाने से पहले नवजात का वजन किया गया तो वजन 1600 ग्राम था। जुलेखा के घर पहुंचने पर सेविका नवजात को देखने उसके घर गई। दूसरे दिन सेविका द्वारा बताया गया तो केयर इंडिया प्रखंड प्रबंधक तुरंत जुलेखा खातुन के घर सेविका के साथ गये। जुलेखा खातुन ने बच्ची का नाम जैनम खातुन रखा। बच्ची की स्थिति बहुत ही नाजुक दिख रही थी। बच्ची इतनी कमजोर थी कि कोई उसे गोद में भी डर से नही उठाता था।

एसएनसीयू में भर्ती कराने के बजाय घर पर हीं किया गया विशेष देखभाल

परिवार वालो को एस.एन.सी.यू. में बच्ची को भर्ती कराने की सलाह दी गयी। परन्तु उनके मन में चिकित्सक के कहे बातो का खौफ भरा था। अतः उन्हाने एस.एन.सी.यू. में बच्ची को भर्ती कराने मे कोई दिलचस्पी नही दिखाई। उनका मानना था कि अब भर्ती करने से भी कोई फायदा नही है। जैनम खातुन (शिशु) को रुई मे लपेट कर रखा गया था एवं रुई के सहारे ही उसे दूध भी पिलाया जा रहा था। उन्हे समझाया गया कि रुई के सहारे दूध पिलाना खतरनाक हो सकता है इससे रुई के रेशे बच्ची के गले में फंस सकता है।

कंगारू मदर केयर से मिला जीवनदान

स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा जुलेखा खातुन को कंगारु मदर केयर के बारे में समझाया गया एवं इससे होने वाले फायदे के बारे में बताया गया। साथ ही एक केस के बारे मे भी बताया गया जो उचकागांव के दहीभता गांव का था उसमें भी एक बच्ची को लगातार कंगारु मदर केयर के माध्यम से बचाया गया था। उस बच्ची के जन्म लेते ही उसकी माता की मृत्यु हो गई थी एवं उसका वजन मात्र 1500 ग्राम था। इससे जुलेखा खातुन इतनी प्रभावित हुई कि उसने प्रण कर लिया की मै भी अपनी बच्ची को कंगारु की तरह दिन रात अपने सिने से लगाये रहुंगी और इसे बचा लुंगी। इसी दृढ़ निश्चय के साथ जुलेखा कंगारु मदर केयर देने लगी एव स्तनपान कराने लगी।

स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों व आंगनबाड़ी सेविका ने बढ़ाया हौसला

स्वास्थ्य विभाग कर्मियों, केयर इंडिया प्रखंड प्रबंधक, आशा आंगनबाड़ी सेविका द्वारा लगातार सात दिनो तक जुलेखा खातुन के यहा गृह भ्रमण कर उसका हौसला बढाया गया। लगातार बच्ची को एस.एन.सी.यू. में भर्ती कराने के लिए प्रेरित किया गया। लेकिन जुलेखा खातुन ने बताया कि अब वहां भर्ती करने से क्या फायदा। अब तो कंगारु मदर केयर करने से बहुत फायदा हो रहा है। धीरे-धीरे बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। तबीयत खराब होने पर बच्ची को कभी कभी चिकित्सक से भी दिखा दिया जाता था। मां के अथक प्रयास एवं दृढ़ निश्चय से जैनम खातुन आज 8 माह की हो गई है। इस समय उसका वजन 6 किलो ग्राम हो गया है।

अब घर में खुशियां बिखेर रही है जैनम

जैनम खातुन अभी भी पीला ग्रेड में है। उसे उपरी आहार देना शुरु कर दिया गया है। कमजोर होने के वजह से डर के कारण जैनम खातुन का समय पर टीकाकरण नही हो पाया था। अब जाकर उसे पेन्टा- 1 का टीका लगा है। टीका देने में कुछ देरी लॉक डाउन के कारण भी हुआ। आज जैनम खातुन पूरी तरह स्वस्थ्य है। जुलेखा खातुन एवं सितारा खातुन अत्यंत खुश है कि जिससे वो नाउम्मीद हो रहे थे वही परीयो सी पूरे घर में खुशियां बिखेर रही है। जुलेखा खातुन एवं सितारा खातुन इसमें कंगारु मदर केयर को बड़ा श्रेय देती है। इसमें एएनएम अनुपमा कुमारी, आशा कार्यकर्ता संध्या देवी, आंगनबाड़ी सेविका शम्मा प्रवीन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।