बाढ़ के पानी में जमींदोज हुए एक गांव के कई पक्के मकान

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परवेज अख्तर/गोपालगंज:- यूं तो गंडक नदी में आई भीषण बाढ की त्रासदी को जिले तीन प्रखंडो बैकुंठपुर, सिधवलिया व मांझा के कई गांवों ने झेला है लेकिन सबसे बड़ी तबाही बैकुंठपुर प्रखंड के कुछ गांवो ने झेला है। बैकुंठपुर प्रखंड क्षेत्र के बंगरा पंचायत के कीर्तपुरा गांव (वार्ड संख्या 1 व 2) का दौरा आज हमने किया। इस गांव ने भीषण बाढ से उस बर्बादी को झेला जो सामान्य होने में वर्षों लग जाएंगें। गंडक नदी के तट पर बसे इस गांव में बाढ के पानी की मुख्यधारा होने की वजह से कई नवनिर्मित मकानों को भी अपनी आगोश में ले लिया और एक के बाद करीब पन्द्रह पक्के आवासीय मकान जमींदोज हो गए। बांध टूटने के घण्टे भर के भीतर ही पानी की तेज बहाव में सबसे पहले बिपिन मिश्र का नवनिर्मित मकान भरभराकर गिर गया।

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आसपास के लोगों ने अपने अपने घरों से परिजनों को निकालना शुरू किया, तबतक रंजन मिश्रा, सुबोध मिश्रा का नवनिर्मित मक्का भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। इसके बाद आसपास के मुन्ना मिश्रा, गणेश मिश्रा,अशोक मिश्रा दरोगा महतो, देवेंद्र नाथ शर्मा, हीरा महतो, जगदीश दास, बृज नन्दन सिंह, टिपन दास, सुनील दस, चन्द्रिका दस, राजकुमार दास सहित 15 आवासीय मकान एक एक कर ध्वस्त हो गए। नुकसान का आकलन करें तो करोड़ो का नुकसान होने का अनुमान है।वर्तमान परिस्थितियां कम मुश्किल भरी नहीं हैं। आज भी इस गांव के ग्रामीण घर से बाहर निकलने के लिए नाव का सहारा ले रहे है। रास्ते बाढ के पानी से कट गए है जिसकी म मरम्मती का काम शुरू भी नहीं हुआ है।

जिनके घर जमींदोज हो चुके है वो अपने परिजनों के साथ यत्र तंत्र रहकर गुजारा कर रहे है। कोई अपने सगे सम्बन्धियों के यहा रहकर गुजर कर रहा है तो कोई पड़ोसियों के रहमोकरम पर मुसीबत के इस घड़ी में गुजारा रहा है। कुछ ग्रामीण बांध पर खुले आसमान तले दिन गुजार रहे है घर ध्वस्त होने के बाद गृह स्वामियों के अरमान भी बाढ़ के पानी मे बह गए है। जीवन भर की कमाई को इकठ्ठा कर रिटारमेंट के पैसे से घर बनाने वाले पूर्व फैजी बिपिन मिश्रा कहते है कि अब किस पैसे व कमाई से ध्वस्त हुए घर को खड़ा किया जाएगा। जीवन भर की कमाई का पाई पाई इकट्ठा कर रिटारमेंट के बाद घर बनाया था कि गांव में रहकर पेंशन के सहारे जीवन गुजर करेंगे। घर तैयार भी हो गया था। लेकिन अभी गृह प्रवेश भी नहीं हुआ था कि बाढ के पानी में घर ध्वस्त हो गया और सारे अरमान बिखर गए।

बाढ का पानी तो निकल गया लेकिन मुश्किल में है जिन्दगानी।

बाढ के पानी में अपना घर खो चुके लोगों के लिए अपना गुजारा करना आज भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। जिनका मकान बाढ़ की पानी मे ध्वस्त हो गया है उनके दिनचर्या का पालन करना भी मुश्किल है। शौचालय ध्वस्त हो जाने के कारण शौच इत्यादि के लिए भी नाव के सहारे पार कर मैदानी क्षेत्रों में जाने को मजबूर हैं। मवेशियों के लिए चारे पानी की व्यवस्था करने मुश्किल है। बाढ के पानी में खाने के सामान से लेकर मवेशियों के चारे तक बाढ के पानी में बर्बाद हो गए। बिजली के खंभे गिर जाने सप्लाई बाधित है और अंधेरे में जीने को विवश हैं। बाढ के पानी में अबतक इस गांव के लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जहां कभी रोड था आज वहां तीस से चालीस फीट तक बाढ का पानी बह रहा है। कैमरा देखते ही लोग अपनी-अपनी समस्या सुनाने लगते हैं। यह कहने पर कि हमलोग मीडिया से हैं, कहते हैं ठीक से रिपोर्ट बनाएगा साहब। हमारी जिंदगी तबाह हो गई है। दाने-दाने को मोहताज हैं। अब घर कैसे बनेगा ईश्वर ही जानते हैं। इस बाढ ने हमें ऐसा जख्म दिया है जो भरने में सालों लग जाएंगे। अभी भी बाढ राहत का पैसा नहीं आया है।

कोरोना जांच कैम्प को किया बाधित

गोपालगंज।जिले के सिधवलिया प्रखंड के सुपौली पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 101 पर चल रहे कोरोना जाच कार्य को उसी गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा बाधित कर दिया गया। इस दौरान केंद्र पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लाये गए किट व कुर्सी भी फेक दिए जाने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं सेविका का समान फेकने की धमकी भी दी गयी। इस मामले में सेविका मीना देवी ने पीएचसी सिधवलिया, बाल विकास परियोजना कार्यालय और सिधवलिया थाना में आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।

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