पप्पू यादव प्रकरण: ‘सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् ‘

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  • यदि पप्पू सच बोल रहें हैं तों नीतीश जी आप उन्हें फांसी चढ़ा दें पर आप मानें की आपकी डबल इंजन की सरकार पूरी तरह फेल है।
  • सरकार को डिप्रेशन में लाना पप्पू यादव को पड़ा महंगा
  • छपरा में पर्दानशीं 40 एम्बुलेंस को पप्पू यादव ने किया था बेपर्दा

✍️परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ :

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अच्छा ही हुआ जो पूर्व सांसद पप्पू यादव को पटना में गिरफ्तार कर लिया गया। सरकार की तरह मैं भी मानता हूं कि वे अपराधी हैं। उन्होंने बड़ा गुनाह किया है। उनका सबसे बड़ा गुनाह यह है कि वे सच बोल रहे हैं। सिस्टम की नाकामी को सबूत के साथ उजागर कर रहे हैं। जिसकी कोई नहीं सुन रहा, उसकी मदद कर रहे हैं।

भारतीय संस्कृति में भी कहा गया है:

‘सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम्’

यानी अप्रिय सच नहीं बोलना चाहिए। पप्पू यही कर रहे थे। वे लगातार, बिना रुके, बिना थके, बिना डरे, कोरोना पीड़ितों के दर्द को उजागर कर रहे थे। सरकार के दावों की पोल खोल रहे थे। उसे आईना दिखा रहे थे। सरकारी अधिकारियों तक को जब कहीं रेमडेसिविर नहीं मिल पाता था तो वे पप्पू यादव के पास आते थे और दवा लेकर जाते थे। निजी अस्पतालों के लूटतंत्र के लिए खतरा बने हुए थे। यह तो सीधे-सीधे सत्ता को चुनौती थी।

pappu yadav in thana

व्यवस्था की खामियों को दिखाकर वे निगेटिविटी फैला रहे थे। इससे जनता तो नहीं लेकिन सरकार जरूर डिप्रेशन में आ गई थी। छपरा में पर्दानशीं 40 एम्बुलेंस को बेपर्दा कर तो उन्होंने हद ही कर दी। यह तो सीधे-सीधे सरकार का चीर हरण जैसा था ? कोई सरकार को बेपर्दा करे तो सरकार भला क्या करेगी ? मैं सहमत हूँ कि पप्पू यादव पर सच बोलने, सरकार को डिप्रेशन में लाने, उसके चीर हरण की चेष्टा और पीड़ितों की मदद के संगीन जुर्म में फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलना चाहिए और कठोरतम सजा होनी चाहिए ताकि फिर कोई सरकार को आइना दिखाने या अप्रिय सच बोलने का अपराध न करे।