सिवान शहर का चर्चित निर्मम हत्याकांड को पुलिस द्वारा सड़क दुर्घटना में बदलने पर लोग सड़क पर उतरे

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  • शहर के पुरानी किला व बबुनिया मोड़ होते हुए जेपी पहुंचा था विरोध मार्च
  • 10-दस लाख रुपया व नौकरी की सरकार से मांग

परवेज अख्तर/सिवान: शहर के जेपी चौक पर शनिवार को पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ लोगों ने विरोध जताया। हाथों में साहिल व शहबल को न्याय दो, लिखी तख्तियां लिए काफी संख्या में मौजूद लोग पुलिस से न्याय की मांग कर रहे थे। विरोध करने में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। घरों से निकलकर साहिल व शहबल को न्याय दिलाने के लिए जेपी चौक तक पहुंची थी। सभी का कहना था कि पुलिस जानबूझकर हत्याकांड को सड़क दुर्घटना में बदल रही है। पीड़ित परिवार ने थाने में हत्या करने को लेकर आवेदन देकर पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस की इस तरह की कार्यशैली से आम लोगों का पुलिस प्रशासन से भरोसा उठेगा। विरोध मार्च शहर के पुरानी किला से बबुनिया मोड़ होते हुए जेपी चौक तक पहुंचा था। मार्च में आइसा से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया था। मौके पर वार्ड पार्षद मंसूर आलम, महमूद आलम, खालिद, इमाम हसन, आइसा जिला सचिव अनीस समशाद अली, छोटे, हीरा बाबू, शकील अहमद, सबना खातून, जबेदा खातून, गुड़िया खातून, इमरान अली, फिरोज कुमार, मिथलेश पटेल, एजाज अंसारी, सैनुल्लाह खान, नेमत खान, दीपक सम्राट, गोल्डन, जुल्फिकार अली व साबीर अली सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।

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पुलिस और आरोपितों से सांठगांठ का लगाया आरोप

माले नेता जयशंकर पंडित ने कहा कि सीवान में आए दिन हत्याएं हो रही हैं। इधर पुलिस की कार्यशैली के कारण बदमाश सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं। साहिल और शहबल हत्याकांड में भी पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिंह उठने शुरू हो गए हैं। पुलिस जानबूझकर हत्यारोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है। आइसा जिलाध्यक्ष विकास यादव ने भी पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि प्रशासन की मिलीभगत से ही जिले में आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं पूर्व लोजपा नेता मुजफ्फर इमाम ने पीड़ित परिवार को दस-दस लाख रुपया व एक-एक नौकरी देने की सरकार से मांग की।

दस दिन में आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो होगा घेराव

पुलिस की कार्यशैली से क्षुब्ध विरोध मार्च में शामिल लोगों ने बताया कि साहिल व शहबल हत्याकांड से जुड़े आरोपितों को दस दिनों के भीतर गिरफ्तार करने की बात कही गयी है। यदि दस दिनों के भीतर खुलेआम घूम रहे आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो भाकपा माले के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन का घेराव किया जाएगा।