रमजान खैर व बरकत का महीना : मुफ्ती इश्तियाक

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परवेज अख्तर/सिवान : जिले के पचरुखी प्रखंड के तरवारा बाजार स्थित मदरसा जामिया बरकातिया अनवारुल उलूम के मुफ्ती मो. इश्तेयाक रजा कादरी ने रमजानुल मुबारक पर फजीलत बयान करते हुए कहा कि माहे रमजान खैर व बरकत का महीना है। इसकी हर घड़ी रहमत भरी हुई है। इस महीने में रोजेदार का सोना भी इबादत में लिखा जाता है। रमजान के रोजेदार के लिए दरियां की मछलियां इफ्तार तक दुआएं मगफेरत करती रहती हैं और रोजा बातिनी यानी छुपी हुई इबादत है। अल्लाह बातिनी इबादत को ज्यादा पसंद फरमाता है। एक हदीस में यह भी है कि रोजा इबादत का दरवाजा है। उन्होंने कहा कि हर चीज की जकात है तथा बदन की जकात रोजा है। इस माह में जो मालिके नेसाब हैं वह अपने दौलत में से ढाई प्रतिशत जकात निकालें, क्योंकि दौलत (माल) की जकात निकाल देने से वह दौलत महफूज हो जाता है। इस महीने में एक ऐसी रात है जो हजार महीने की इबादत से अफजल है जिसे सबे कद्र कहा जाता हैँ। जिसकी तलाश करने का हमारे सरकार स.अ. ने 21, 23, 25 एवं 27 की रात में तलाश करने का हुक्म फरमाया है और ये भी कहा है कि हदीशे कुदशी है। अल्लाह ने फरमाया कि रोजा मेरे लिए है और मैं ही उसका बदला हूं। पता चला के हर इबादत का सवाब जन्नत है लेकिन रोजेदार के लिए अल्लाह ताला से मुलाकात है। दूसरी ओर उन्होंने कहा कि रोजेदार को दो खुशियां हासिल होती है। पहला जब वह रोजा इफ्तार करता है और दूसरा कि जब वह अल्लाह से मुलाकात करेगा। अंत में उन्होंने कहा कि रमजान के महीने में रोजेदार अधिक से अधिक गरीबों, यतीमों, मिशकीनों की मदद करे तथा नजदीकी एदारा का ख्याल रखें।

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