रोजा व कुरान दोनों करेंगे बंदे की सिफारिश : मौलाना हामिद रजा

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maulana hamid raja

परवेज अख्तर/सिवान : तरवारा मदरसा जामिया बरकातिया अनवारुल उलूम के हेडमास्टर मौलाना हामिद रजा कादरी ने रमजानुल मुबारक पर फजिलत बयान करते हुए कहा कि रमजानुल मुबारक के इस्तेकबाल के लिए पूरे साल जन्नत को सजाया जाता है। हदीस में है कि नबी. स.अ. ने फरमाया कि बेशक जन्नत शुरू से आखिरी साल तक सजाई जाती है और रमजान शरीफ के पहले दिन जन्नत के पेड़ों के नीचे से बड़ी-बड़ी आंखों वाली हुरों पर हवा चलती है और वह अर्ज करती है कि ऐ अल्लाह अपने बंदों में से ऐसे बंदों को मेरा शौहर बना कि जिनको देखकर हमारी आंखें ठंडी हो और जब वे हमें देखें तो उनकी आंखें भी ठंडी हो। उन्होंने कहा कि नबी. स.अ. ने फरमाया कि जो शख्स इमान और इकान के साथ रमजान का रोजा रखेगा तो उसके पिछले तमाम गुनाह बख्श दिए जाएंगे और ये भी फरमाया कि जो सख्त अल्लाह की राह से एक दिन का रोजा रखेगा तो उसके और जहन्नम के दरम्यान एक खंदक बना देगा। जैसा कि जमीन और आसमां के दरम्यान है। उन्होंने कहा कि एक हदीस में यह है कि रोजा और कुरान दोनों बंदों की सिफारिश कयामत के दिन करेंगे। रोजा कहेगा कि ऐ अल्लाह, मैंने इसको दिन भर खाने-पीने और सोहवत से रोका है। इसलिए इसके हक में मेरी सिफारिश कबूल फरमा और दूसरी तरफ कुरान अर्ज करेगा कि मैंने इसको रात में सोने से रोका है इसलिए इसके हक में मेरी सिफारिश कबूल फरमाया। यहां तक कि दोनों की सिफारिश कबूल कर ली जाएगी और उसे जन्नत में मुकाम अता हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इबादत करने के साथ-साथ उसको बचाना भी जरूरी। हदीस शरीफ के अंदर है। नबी ए करीम स.अ. ने शहाबा से फरमाया कि मुफलिस कौन है तो शहाबी ने अर्ज किया जिसके पास माल एवं दौलत न हो, वहीं तो गरीब है लेकिन नबी ने फरमाया कि वो गरीब नहीं है। मेरी उम्मत का कयामत के मैदान में मुफलिस वो होगा जो नमाज, रोजा, हज, जकात जैसे आमाल लेकर आएगा। लेकिन किसी को गाली दी होगी किसी पर तोहमत लगाया होगा, किसी का खून बहाया होगा, किसी पर जुल्म किया होगा, तो उसकी नेकियां जिस-जिस पर उसने जुल्म होगा बांट दी जाएगी और उसके गुनाह उसके आमाल में डाल दिए जाएंगे। पता चला कि जन्नत में जाने वाला जहन्नम में गया और जहन्नम में जाने वाला जन्नत में गया।