शब-ए-बरात: गुनाहों से तौबा करने की रात है शब-ए-बरात

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इस्लाम धर्म के अनुयायी पूरी रात तिलावत व सखावत कर करते हैं इबादत

परवेज अख्तर/सिवान: इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बरात पर्व शाबान माह की चौदह तारीख को मनाया जाता है. इस बार 28 मार्च को शब ए बरात मनाई जाएगी. इसके लिए कब्रिस्तानों की साफ-सफाई शुरू कर दी गयी है. शब-ए-बरात के दिन मुस्लिम समुदाय इलाकों में इसकी तैयारी की जा रही है. शब ए बरात के दिन इस्लाम धर्म के अनुयाई पूरी रात तिलावत और सखावत (दान-पुण्य) कर इबादत करते हैं. इस दिन जिले भर की छोटी से लेकर बड़ी मस्जिद व घरों में लोग इबादत कर दुआ मांगेंगे. रात में कब्रिस्तान में जाकर दुनिया से रुखसत हो चुके पूर्वजों के मोक्ष की दुआ मांगेंगे. पूरी रात लोग घरों में और मस्जिदों में नफिल नमाज और कुरान की तिलावत करेंगे. मान्यता है कि बीते वर्ष किए गए कामों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली रात को शब- ए-बारात कहा जाता है. इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है. नमाज, तिलावत ए कुरान, कब्रिस्तानों में अपने पूर्वजों तथा अपने बीच जो दुनिया से जा चुके हैं. उनके लिए रोशनी और दुआएं की जाती है.

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खैरात करना इस रात का अहम काम

गौरतलब है कि शब ए बरात में बहुत से लोग इस दिन और इसके दूसरे दिन रोजा रखते हैं.इस दिन घरों में मोमबत्तियां जलाकर उन लोगों के लिए भी दुआएं की जाती है जो इस दुनिया से जा चुके हैं. उनके नाम पर गरीबों को खाना खिलाया जाता है. हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात का अहम काम है. इस दिन मुस्लिम बहुल इलाकों में मस्जिदों और घरों की सजावट तथा कहीं-कहीं जलसे का भी एहतेमाम किया जाता है. आमतौर पर शब ए बारात में चने का हलवा व सूजी का हलवा बनता है.

गुनाहों की होती है माफी

शहर के पुरानी बाजार स्थित शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इसरारुल हक बताते है कि इबादत, तिलावत और सखावत के इस त्योहार के लिए मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास सजावट की जाजी है. रात में मनाए जाने वाले शब-ए-बरात के त्योहार पर कब्रिस्तानों में भीड़ का आलम रहता है. पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बरात कहा जाता है. इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है. नमाज,तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम है. वहीं शहर के मोहन बाजार स्थित मदरसा अजीजीया असफीया मदरसा के शिक्षक सह मौलाना जमुरुद्दिन रिजवी कहते हैं कि शब ए बरात में शब का अर्थ रात्रि व बारात का मतलब बड़ी होना है. उन्होंने कहा कि इस रात की बहुत अहमियत है.

इस माह में अल्लाह अपने बंदों को खैर व बरकत से ज्यादा नवाजता है. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि इस बार अकीदत से इबादत करें. कुरान की तिलावत करें. इसमें गुनाहों की माफी व दुआएं कबूल होती है. मुस्लिम धर्मावलंबियों के प्रमुख पर्व शब-ए-बरात के मौके पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में शानदार सजावट होगी तथा जल्से का एहतेमाम किया जाएगा. रात में मुस्लिम इलाकों में शब-ए-बरात की भरपूर रौनक होगी. शब-ए-बरात की रात नगर में कई स्थानों पर जलसों का आयोजन किया जाएगा. इस्लामी मान्यता के मुताबिक शब-ए-बरात की सारी रात इबादत और तिलावत का दौर चलता है. साथ ही इस रात मुस्लिम धर्मावलंबी अपने उन परिजनों, जो दुनिया से रूखसत हो चुके हैं, की मगफिरत की दुआएं करने के लिए कब्रिस्तान भी जाते हैं.