सिवान: 11 सूत्री मांगों को लेकर चिकित्सकों ने किया ओपीडी का बहिष्कार

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परवेज अख्तर/सिवान: जिले के विभिन्न प्रखंडों में चिकित्सक के संगठन भासा के आह्वान पर चिकित्सक हड़ताल पर रहे। इस दौरान ओपीडी सेवाएं बाधित रहा। ओपीडी में सन्नाटा पसरा रहा। अपनी इलाज कराने आए मरीजों व उनके स्वजनों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। जानकारी के अनुसार भगवानपुर हाट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभी चिकित्सकों ने अपने संगठन भासा के आह्वान पर गुरुवार को 11 सूत्री मांगों को लेकर ओपीडी का बहिष्कार किया इससे अस्पताल में सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रमेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि भगवानपुर में जहां 13 चिकित्सक की आवश्यकता है वहां तीन चिकित्सकों से काम लिया जा रहा है। परिणाम स्वरूप भगवानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित चिकित्सकों को छुट्टी तक नहीं मिल पाती है। चिकित्सकों के लिए आवास सुविधा नहीं होने के कारण किराए के मकान में रहने के लिए मजबूर हैं।

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चिकित्सकों ने अपनी मांगों में कहा है कि चिकित्सकों का कार्य अवधि का निर्धारण, आवास व सुरक्षा उपलब्ध कराने हेतु ठोस कदम उठाना व वर्तमान में संशोधित सुरक्षा कानून को प्रभावी बनाना, मूल वेतन का 50 फीसदी ग्रामीण भत्ता अनुमान्य किया जाए, महिला चिकित्सकों के पदस्थापन व सुरक्षा के ठोस कदम उठाया जाए, चिकित्सकों व पारा मेडिकल स्टाफ के साथ अप्रिय घटना होने पर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, चिकित्सकों के गृह जिले में पदस्थापना आदि मांगें शामिल थीं। वहीं बसंतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी मांगों को ले चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया।

इस संबंध में चिकित्सा पदाधिकारी डा. कुमार रवि रंजन ने बताया कि अस्पताल में ओपीडी को छोड़कर सभी इमरजेंसी सेवाएं सुचारु रूप से चलीं। दारौंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य प्रबंधक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार की दोपहर 12 बजे से सभी चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं। आंदर में भी सभी चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। यह जानकारी देते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. अमितेश कुमार ने बताया सभी चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इस कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। वहीं मैरवा में हड़ताल की सूचना नहीं रही यहां सभी सेवाएं अन्य दिनों की तरह जारी रही।