सिवान: पति की लंबी उम्र की सलामती के लिए महिलाएं आज करेंगी निर्जला व्रत

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  • संध्या में शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर मांगेंगी वरदान
  • हरितालिका तीज को लेकर बाजार में बढ़ी रही चहल-पहल

परवेज अख्तर/सिवान: भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले हरितालिका तीज को ले सुहागिन महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पति की लंबी उम्र की सलामती के लिए निर्जला व्रत रखकर गुरुवार की शाम पारंपरिक रूप से मिट्टी का शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा-अर्चना करेंगी, वहीं शुक्रवार की सुबह श्रृंगार पिटारी को छुने के बाद व्रत का समापन करेंगी। इधर, तीज व्रत की तैयारी में बुधवार को महिलाएं दिनभर जुटी रहीं। घर में त्योहार को देखते हुए गुझिया व मठरी बनाने के अलावा पूजन सामग्री, कपड़े व शृंगार की सामग्री खरीदने के लिए बाजार भी पहुंचती रहीं। सुहागिन महिलाएं अपने लिए रंग-बिरंगी साड़ियां, चूड़ी-लहठी व श्रंगार सामग्री के साथ ही दान-पुण्य करने के लिए सामग्री भी खरीद रही थीं। शहर के जेपी चौक, दरबार रोड, कचहरी रोड व थाना रोड में श्रृंगार की पिटारी में छुने के लिए सामग्री की जमकर बिक्री हो रही थी। शहीद सराय व थाना रोड में बांस की बनी छितनी की खरीद-बिक्री हो रही थी। पंडित उपेन्द्र पांडेय ने बताया कि तीज तिथि सुबह से रात्रि 2 बजकर 14 मिनट तक है। तथा हस्त नक्षत्र शाम को पांच बजकर 14 मिनट तक है। तीज का महत्व हस्त नक्षत्र के संयोग से श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए पूजन का विषेष समय सुबह से 5 बजकर 14 मिनट तक माना जायेगा।

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नियमों का पालन करते हुए व्रत का समापन करेंगी

सुबह पूर्ववत नियमों का पालन करते हुए महिलाएं व्रत का समापन करेंगी। इधर, व्रतधारी ममता देवी ने बताया कि तीज व्रत में महिलाएं माता गौरी से सौभाग्यवती होने का वरदान मांगती हैं। बताया कि यह व्रत निर्जल रखा जाता है। इसलिए यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। प्रिया भारद्वाज, रंजना श्रीवास्तव व प्रीति सर्राफ ने बताया कि हरितालिका तीज सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य व अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए भगवान शिव व देवी पार्वती की पूजा-अर्चना निर्जला व्रत रखकर करती हैं। बताया कि इसी दिन माता पार्वती ने एक गुफा में मिट्टी का शिवलिंग बनाकर विधि-विधान से पूजा की थी। पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।