सिवान: टेक्नीशियन के अभाव में एड्स मरीजों की नहीं हो रही सीडी फोर जांच

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  • 0 से 15 साल तक के बच्चे की एचआईवी की दवा मार्च से ही है समाप्त
  • 2542 एचआईवी एड्स रोगी हैं जिले में, 1380 पुरुष, 1159 महिला व 3 किन्नर 3 हैं शामिल

✍️परवेज़ अख्तर/एडिटर इन चीफ:
सदर अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में एचआईवी एड्स मरीजों की सीडी फोर जांच गोपालगंज स्थित सेंटर में लैब टेक्नीशियन के अभाव के कारण बंद है। वहीं बच्चों की एड्स की दवा की भी कमी हैं। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है कि मार्च में बच्चों को दी जाने वाली एचआइवी की दवा समाप्त है और इसे मंगवाने की पहल नहीं की जा रही है। वहीं एड्स पीड़ित मरीजों की जांच नहीं होने से वे भी परेशान हैं। बता दे कि सीडी फोर जांच एड्स मरीजों के लिए जरूरी माना जाता है। इस जांच से एचआईवी एड्स मरीजों के रोग प्रतिरोधन क्षमता की जानकारी मिलती है। इसके बाद चिकित्सक जांच के आधार पर दवाई देते हैं। पहले एआरटी सेंटर नहीं होने के कारण सिवान के एड्स पीड़ित मरीजों को जांच के लिए गोपालगंज भेजा जाता था लेकिन एआरटी सेंटर खुलने के बाद पीड़ित मरीजों का सैंपल लेकर उसे जांच के लिए गोपालगंज भेजा जाता है। फिलहाल गोपालगंज में लैब टेक्नीशियन नहीं होने के कारण एड्स मरीजों की सीडी फोर जांच बंद है।

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2542 एचआइवी मरीज हैं जिले में

जिले में कुल 2542 एचआईवी एड्स रोगी हैं। इसमें 1380 पुरूष, 1159 महिला, किन्नर 3 शामिल हैं। बता दें कि सरकारी के द्वारा परवरिश योजना के तहत 0 से 18 साल के युवा रोगी को पौष्टिक आहार के लिए एक-एक हजार रुपये दिया जाते हैं। जबकि बिहार शताब्दी योजना के तहत 18 साल से ऊपर वाले रोगी को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं।

बच्चों की दवा की आपूर्ति कम

मालूम हो कि 0 से 15 साल तक के बच्चे की एचआईवी एड्स की दवा मार्च से ही खत्म थी। इस माह बच्चों का एक दवा आया है जबकि अभी भी दो दवा नहीं है। दवा नहीं रहने से बच्चों को परेशानी बढ़ गई है।

गोपालगंज में होती है सीडी फोर जांच

बता दें कि सदर अस्पताल में स्थित एआरटी सेंटर में एचआईवी एड्स मरीजों की सीडी फोर जांच नहीं होती है, क्योंकि यहां मशीन नहीं है। सीडी फोर जांच के लिए गोपालगंज एआरटी सेंटर भेजा जाता है। जिसकी जांच कर आगे का इलाज होता है।

कहते हैं अधिकारी

लैब टेक्नीशियन के नहीं रहने से एड्स मरीजों की सीडी फोर जांच नहीं हो पा रही है। अगर जरूरत होती है तो उसे पटना रेफर कर दिया जाता है। कुछ बच्चों की दवा नहीं है।

डा. अनिल कुमार सिंह जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी