सिवान: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस धरातल की सबसे यूनिक पर्सन को समर्पित

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परवेज अख्तर/सिवान: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर टाउन हॉल में जिला प्रशासन की अगुवाई में कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को किया गया। मौके पर वक्ताओं ने कहा कि आदिकाल से नारी शक्ति पूजनीय मानी गई है। आज कई मायने में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। यदि एक बालिका पढ़-लिख लेती है तो उससे न सिर्फ उसका परिवार बल्कि पूरा समाज शिक्षित होता है। महिलाओं के प्रति अच्छी धारणा बनाने व महिलाओं की सफलता की कहानी को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही गई। डीएसओ प्रमोद कुमार ने कहा कि आज के दिन पुरुष समाज महिलाओं को सम्मानित करने का संकल्प लें और इसकी शुरुआत वह अपने घर से ही करें। कहा कि एक नारी किसी भी समय किसी भी परिस्थिति का सामना बहादुरी से कर सकती है। डीपीआरओ राजकुमार गुप्ता ने कहा कि आज का दिन धरातल पर की सबसे यूनिक पर्सन को समर्पित है।

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नारी किसी भी परिवार, समाज व देश का सबसे बड़ा अंग है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। डीपीआरओ ने कहा कि भारतीय अपनी नारियों को मातृ शक्ति के रूप में सदा से पूजते आए हैं। सदर एसडीओ रामबाबू बैठा ने कहा कि महिलाएं किसी भी समाज व राष्ट्र की प्रगति की पहचान होती हैं। बिहार में 35 फीसदी महिलाओं को आरक्षण मिलना गर्व की बात है, हालांकि नौकरशाही व राजनीति में आज भी इनकी भूमिका कम है। कहा कि महिलाओं का संर्पूण विकास परिवार व देशहित में है। कवियत्री व लेखिका आरती आलोक वर्मा की रचना, बंद कमरे की कोई ये मूरत नहीं शून्य से बढ़ गई आज की नारियां, गर्दिश से कोई खौफ ना खाती हैं नारियां, मुश्किल को ऊंगलियों पर नचाती हैं नारियां पर पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कोरियोग्राफर श्वेता श्रीवास्तव ने डांस के प्रति अपने लगाव व जुनून की चर्चा करते हुए कहा कि नारी शक्ति को पहचानने की जरूरत है। महिलाएं लगन व परिश्रम से अपने मुकाम को हासिल कर सकती हैं। महिला उद्यमी संध्या सर्राफ ने कहा कि महिलाएं ठान लें तो क्या कुछ नहीं कर सकती हैं। अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आज जिस मुकाम पर वह हैं, उसमें पति व मायके वालों का बहुत बड़ा योगदान है। डॉ. विमला रंजन व पुलिस पदाधिकारी अनुराधा ने अपनी बात रखी। डीपीओ आईसीडीएस प्रतिभा कुमारी गिरि, वरीय उप समाहर्ता वृषभानु चंद्रा, साकेत कुमार व प्रियंका कुमारी, अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अभिषेक चंदन, महिला हेल्प लाइन की पदाधिकारी श्वेता कुमारी, रागिनी कुमारी, पुष्पांजलि कुमारी, शिक्षिका कंचन बाला समेत काफी संख्या में छात्राएं व महिलाएं मौजूद थीं।