मुख्यमंत्री का भाषण नहीं सुन रहे अफसरों पर भड़क गए CM….बोले -सुन रहे हैं कि नहीं या आपसे में बात करेंगे, हमरा बतवा सुन रहे हैं ?

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पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज समस्तीपुर पहुंचे। सीएम ने पटेल मैदान से दहेज प्रथा एवं बाल-विवाह जैसी कुरीतियों के उन्मूलन तथा नशा मुक्ति को लेकर सामाजिक जागरूकता लाने को लेकर जनसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम शराब पीने की कभी भी इजाजत नहीं दे सकते। सीएम नीतीश ने कहा कि हमने सभी क्षेत्रों में काम किया। लड़कियों के लिए साईकिल योजना को देखने इंगलैंड समेत अन्य देशों की टीम देखने आई। अब तो हमको नहीं न याद रखना चाहता है …..बहुत लोग। वहीं सीएम नीतीश के भाषण को सुनने की बजाए आपस में बात कर रहे अफसरों पर सीएम नीतीश भड़क गये। मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान कर दिया कि अगर ताड़ से ताड़ी उतारने की बजाये नीरा का उत्पादन करेगा तो उस परिवार को एक लाख रू की आर्थिक मदद दी जायेगी।

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मंच से सीएम नीतीश नीरा के फायदे गिना रहे थे। वे कह रहे थे कि नीरा स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है जबकि ताड़ी नुकसानदायक। हम ताड़ से ताड़ी उतारने वाले परिवार को आर्थिक मदद देंगे। मंच पर बैठे अधिकारियों की तरफ मुड़ कर सीएम नीतीश ने देखा तो वे लोग आपस में बातचीत कर रहे थे। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सुन रहे हैं कि नहीं कि आपसे बात कर रहे हैं? हमरा बतवा सुन रहे हैं? अगर सुन रहे हैं तो आज हम ऐलान कर देते हैं कि ताड़ी की बजाए नीरा उत्पादन करने पर एक लाख रू की आर्थिक सहायता दी जायेगी।

सीएम नीतीश ने कहा कि जब शराबबंदी लागू हुआ था उसके बाद भी यात्रा पर निकले थे। इस बार समाज सुधार यात्रा पर निकले हैं। हमारी तो शुरू से इच्छा था कि शराबबंदी लागू हो। लेकिन मन में लगता था कि पूरे तरीके से लागू होगा या नहीं…क्यों कि इसी धरती पर कर्पूरी ठाकुर ने लागू किया था। लेकिन जब वो हटे तो शराबबंदी कानून को हटा दिया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी सफल बनाने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। एक बार फिर से वरिष्ठ आईएएस अफसर के.के. पाठक को मद्य निषेध विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वे लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2016 में जब शराबबंदी लागू किये तो कुछ लोगों ने कहा कि डॉक्टर ने शराब पीने को कहा है। शराब पीने से कहीं तबीयत ठीक होता है जी…शराब पीने से तबीयत और भी खराब होता है। हमलोग शराब पीने की इजाजत देंगे? कुछ तो छचपच करने वाला होता ही है। हाल ही में जहरीली शराब पीने से 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई। शराब पीया तो मरा,यह तो अन्य लोगों के लिए सबक है। समाज के विकास व लोकहित में कितना काम किया? कानून-व्यवस्था को लेकर काफी काम हुआ। पहले शाम में घर से निकलने की हिम्मत कोई करता था ? अब क्या है, शाम की बात छोड़ दीजिए, देर रात भी कोई कहीं जाता है कोई दिक्कत है? अब लोगों में भरोसा जगा है।