सिवान में कोरोना के भय से ठहर सा गया है शहर

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परवेज अख्तर/सिवान :- चीन के हुबेई प्रांत से उठा कोरोना का बवंडर आज देश प्रदेश समेत सीवान के सड़क बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार के फरमान के बाद स्कूल,कालेजों, शॉपिंग मॉल ,जिम एवं अन्य भीड़-भाड़ वाले केंद्रों के बंदी ने इस संक्रमण को और ज्यादा खौफनाक कर दिया है ।जिसे लेकर शहर से लेकर गांव तक लोगों में दहशत व्याप्त है। हालाकी प्रशासनिक स्तर से इसके बचाव एवं लक्षणों को लगातार प्रचारित किया जा रहा है। बावजूद इसके हल्की सर्दी खांसी होने पर लोगों की बेचैनी देखते बन रही है। अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी हो या कार्यालयों में तैनात पदाधिकारी सबके बीच कोरोना का दहशत कायम है ।नोबल करोना वायरस को लेकर पिछले कई दिनों से शहर की रफ्तार ठहर सी गई है। और लोग अनावश्यक घरों से नहीं निकल रहे हैं ।सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दिवसीय जन कर्फ्यू के आह्वान की बाद लोगों को विश्वास हुआ है कि अब बहुत जल्द कोरोनावायरस भारत से समाप्त हो जाएगा।करोना वायरस चक्र को तोड़ने के लिए सरकार के इस प्रयास की चहुओर सराहना हो रही है। और लोग इसके समर्थन में खुलकर आगे आने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रतिदिन लगने वाले जाम से विद्यालयों के संचालन पर रोक के बाद लोगों को निजात मिली है ।तो वहीं दैनिक मजदूरों के सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। कोरोनावायरस को लेकर ठेला, खोमचा एवं दैनिक मजदूरी करने वाले लोग प्रतिदिन शहर आकर काम के अभाव में खाली हाथ वापस लौट रहे हैं। करोना के दस्तक का प्रभाव यह है कि एक मामूली छींक के बाद लोग दहशत जदा हो जा रहे हैं ।और इसे लेकर ठेला खोमचा एवं फुटपाथ दुकानदारों के सामने भी भुखमरी का संकट उत्पन्न हो गया है। शहर के छोटे से लेकर बड़े दुकानदारों के सामने भी यही समस्या उत्पन्न हो गई है ।करोना के डर से लोग आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी से भी डर रहे हैं ।छुआछूत से फैलने वाले रोग होने के कारण अधिकांश लोगों ने बाहर का खाना छोड़ दिया है। जिसके चलते होटल एवं रेस्टोरेंट में एकाएक भीड़ गायब हो गई है ।विद्यालय बंद होने के बाद अभिभावकों में छात्र छात्राओं के पाठ्यक्रम पिछड़ने के साथ-साथ आगामी परीक्षा की भी चिंता साफ देखी जा रही है। तो वहीं कुछ अभिभावकों का मानना है के छात्रों के विद्यालय तो बंद करा दिए गए लेकिन निजी विद्यालयों में लगने वाले शुल्क कौन भरेगा विद्यालयों में बच्चों के पढ़ाई और उनके पाठ्यक्रम के साथ छुट्टी के अवधि को लेकर अभिभावकों में तरह-तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रही है ।वहीं पिछले दिनों अफवाह के बाद शहर में मुर्गा अंडा एवं मांसाहारी पदार्थों के साथ डिब्बाबंद सामानों की बिक्री पर भी मानो ग्रहण सा लग गया है । कोरोना के भय के बाद लोग पाव रोटी ब्रेड पैकेट वाले दूध लस्सी दही आदि से परहेज कर रहे हैं ।

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