सिवान जेल में शिक्षा की लौ से जगमग होगी निरक्षर बंदियों की जिदगी

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परवेज़ अख्तर/सिवान:- बिना शिक्षा के सभ्य समाज व सभ्य परिवार की कल्पना संभव नहीं है। शिक्षित न होने का दर्द वहीं जानता है, जो किसी ना किसी कारण वश अक्षर की डोर से नहीं बंधा हो। इसलिए अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर सिवान मंडलकारा में निरक्षर बंदियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सभी निरक्षण बंदियों को साक्षर बनाया जाएगा। इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी जेल में बंद साक्षर बंदियों को दी गई है। बंदियों को कम से कम वर्तनी ज्ञान प्रदान किया जाएगा ताकि वे समाचारपत्र, मैगजीन पढ़ सकें, आवेदन लिख सकें और हिसाब किताब कर सकें। पठन पाठन कार्य के लिए ब्लैकबोर्ड, खल्ली, कागज, पेंसिल व अन्य शिक्षण सामग्री की व्यवस्था काराधीक्षक करेंगे। वहीं समय-समय पर उसकी निगरानी भी मंडलकारा अधीक्षक करेंगे।

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15 से 20 बंदियों को दिया जाएगा दायित्व

मिली जानकारी अनुसार अशिक्षित बंदियों को साक्षर बनने के लिए एक कुशल पढ़े लिखे बंदी को अधिक से अधिक 15 से 20 बंदियों को ही पढ़ाने का दायित्व दिया जाएगा। जिसे बंदियों की पढ़ाई पूरी हो सके।

कहते हैं अधिकारी

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस से अशिक्षित बंदियों को साक्षर बनने का कार्य शुरू किया गया है। जेल में जो भी साक्षर बंदी हैं, उन्हें अशिक्षित बंदियों को पढ़ाने के काम में लगाया गया है।