किशोर न्यायालय बोर्ड के दफ्तर को चोरों ने बनाया निशाना, जांच के दौरान कोर्ट परिसर में मिली शराब की बोतलें

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परवेज अख्तर/सीवान : बिहार के सीवान में नगर थाना क्षेत्र के दाहा नदी के समीप स्थित व्यवहार न्यायालय के परिसर में बुधवार की रात चोरों ने किशोर न्यायालय बोर्ड सहित 3 मजिस्ट्रेट के दफ्तर का ताला तोड़कर महत्वपूर्ण रिकॉर्ड चोरी कर लिया. चारों दफ्तरों से कौन-कौन से रिकॉर्ड या समान की चोरी हुई है. इसकी जानकारी नहीं हो सकी है. पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा ने जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम को फॉरेंसिक जांच तथा डॉग स्कवायर्ड की टीम को जांच के लिए बुलाया है. इसलिए सभी दफ्तरों को पुलिस द्वारा सील कर दिया गया है. घटना के संबंध में किशोर न्यायालय बोर्ड के पेशकार कृष्ण मोहन ने बताया कि आज सुबह करीब 8:30 बजे कोर्ट के नजीर ने फोन कर बताया कि किशोर न्याय बोर्ड कार्यालय में गेट का ताला तोड़कर चोरों द्वारा चोरी की गयी है. इसके बाद वे जब कोर्ट पहुंचे तो देखा कि चोरों ने मुख्य द्वार का ताला तोड़कर प्रधान दंडाधिकारी अरविंद कुमार के चेंबर का ग्रिल तोड़कर चोरी की है .इसकी सूचना पुलिस को भी दी गयी.घटना की छानबीन करने सदर एसडीपीओ जितेंद्र कुमार पांडे, नगर थाना इंस्पेक्टर जय प्रकाश पंडित और मुफस्सिल थाना की पुलिस कोर्ट परिसर में पहुंची. चोरी की घटना परिसर के अन्य मजिस्ट्रेट के भी कार्यालय में हुई है. इसमें जुडिशल मजिस्ट्रेट हिना मुस्तफा और प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी एके त्रिपाठी के कार्यालय का भी ताला तोड़कर चोरों ने चोरी की है. सदर एसडीपीओ ने चोरी की घटना की छानबीन करते हुए कहा कि इस मामले में फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की टीम आने वाली है. उन्होंने कोर्ट कर्मचारियों से कहा कि जिस प्रकार से कार्यालय की स्थिति है, उसे उसी तरह रहने दे. इससे छानबीन करने में सहूलियत होगी. कार्यालय में किसी को प्रवेश नहीं करने दिया गया. इसके पहले भी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मजिस्ट्रेट अफसर कॉलोनी में प्रधान मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार के आवास में चोरी हुई थी. चोरी की बढ़ती घटनाओं के लेकर सभी जजों में काफी आक्रोश है. वही कोर्ट कर्मियों का कहना है कि इससे पूर्व आवास पर चोरी उसके बाद कार्यालय में चोरी की घटना इससे साफ पता चलता है कि पुलिसिया व्यवस्था लचर है. वहीं कोर्ट परिसर में आधा दर्जन से अधिक शराब की बोतलें पाई गयी हैं. इससे यह साफ पता चलता है कि शराबबंदी के बाद भी सरकारी दफ्तर शराब से अछूते नहीं हैं. दूसरी ओर एक सवाल खड़ा होता है कि कोर्ट परिसर में शराब की बोतलें कहां से आई?

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