पाकिस्तानी झंडा का किया विरोध तो डाल दिया गया जेल में

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10 माह बाद अपने स्वदेश लौटा गुलाम

गुलाम किरान ऑपरेटर के पद पे था सऊदी अरब के जुबैल में कार्यरत

सीवान जिले के चांदपाली का है गुलाम

परवेज़ अख्तर/सीवान:- सऊदी अरब में कार्यरत किरान ऑपरेटर द्वारा पाकिस्तानी झंडा का विरोध करना उस समय महंगा साबित हुआ जब की जब उसने बिरोध करना शुरू किया। इस दरम्यान भारतीय एवं पाकिस्तानियों के बीच जमकर मारपीट हुई। सऊदी अरब की हुकूमत ने जेल के सलाखों में डाल दिया।उक्त घटना 14 अगस्त की है। बता दें कि सिवान जिले के जीरादेई थाने के चांदपाली गांव निवासी सह विधान पार्षद केदारनाथ पांडेय के जिला प्रतिनिधि सिफतुल्लाह उर्फ गोरख नेता के पुत्र गुलाम याहिया सऊदी अरब के जुबैल स्थित एक कंपनी में किरान ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। इसी बीच उसके क्वार्टर में रह रहे पाकिस्तानी कर्मियों ने उसके बेड पर 15 अगस्त के मौके पर के पूर्व 14 अगस्त को ही पाकिस्तानी झंडा फहरा दिया। जब भारतीय गुलाम याहिया कंपनी कंपनी से अपने क्वार्टर पहुंचा तो अपने बेड पर फहरते पाकिस्तानी झंडा को देख आगबबूला हो गया तथा हंगामा खड़ा कर दिया। इसी बीच क्वार्टर में रह रहे पाकिस्तानियों ने हंगामा का विरोध किया तो दोनों तरफ से जमकर मारपीट शुरू हो गई।हंगामा की सूचना पाकर आसपास में मौजूद पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंच गए और दोनों पक्षों के लोगों को हिरासत में लेकर चली गई। बाद में पूछताछ के बाद एक मामला दर्ज कर दोनों पक्षों के लोगों को जेल भेज दिया। इसमें सिवान जिले के जीरादेई थाना क्षेत्र के चांदपाली गांव का भी युवक शामिल था। बाद में इस घटना की जानकारी वहां मौजूद परिचितों नेउसके परिजनों को दी। विधान पार्षद केदारनाथ पांडेय की पहल पर इंडिया एंबेसी द्वारा तहकीकात के बाद उसे 10 माह बाद मुक्त कराया गया।मुक्त होने के बाद सऊदी हुकूमत ने उसे सकुशल मुंबई के लिए ओमान एयर लाइंस पर बैठा दी ताकि वह सकुशल अपने स्वदेश लौट गए। मुंबई आने के बाद वह गोदान एक्सप्रेससे अपने घर को लौट रहा है।

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10 माह बाद गुलाम के घर में लौटी खुशहाली

10 माह सऊदी अरब के जेल में बंद गुलाम के घर में उस समय खुशहाली लौटी जब सऊदी अरब की हुकूमत द्वारा उसे रिहा करने की सूचना उसके परिजनों को मिली।बता दें कि गुलाम के घर में 10 माह से मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था।

अजमेरी ने परिवार संग नहीं मनाती ईद

मुसलमानों का पवित्र त्योहार ईद उस समय उसकी पत्नीअजमेरी खातून ने नहीं मनाने का निर्णय लिया, क्योंकि उसके पतिसऊदी अरब के जेल में 10 माह से बंद थे। पत्नी अपने पति गुलाम के स्वदेश नहीं लौटने पर यह निर्णय लिया था। उसके चार वर्ष का पुत्र अरहाद अपने पिता की की बांट जोहते-जोहते उसकी आंखें पथरा गई थी। पिता के गम में वह अनसुना सा हो गया था।

मां की आंखों में दिखता था 10 माह से खौफ का मंजर

सऊदी अरब के जेल में 10 माह से बंद गुलाम याहिया की मां नजमा खातून की आंखों में 10 माह का खौफ का मंंजर दिखाई देता था। तरह-तरह के गांव में हो रहे चर्चाओं से वह और घबरा गई थी। अपने लाडले के गम में रोते-रोते उसके रिमझिम आंखों के आंसू ही सूख गए थे।उसे क्या पता था कि मेरे लाडले को पाकिस्तानियों के करतूत उसे जिंदगी के उस दहलीज पर ले जाकर खड़ा कर देगी जहां मेरे रिमझिम आंखों की आंसू ही सूख जाएंगे। वहीं पिता सिफतुल्लाह उर्फ गोरख नेता ने कहा कि मेेरा बेटा देश के लिए जेल तो क्या देश के नाम पर उसका गर्दन भी कट जाती तो मुझे गर्व होता।