सूबे के विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार की जांच पर बौखलाया राजभवन…..सरकार को पत्र लिखकर कहा तत्काल कार्रवाई पर रोक लगे….

0

पटना: सूबे में शिक्षा के बजाय भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुके विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार की जांच पर राज्यपाल गरम हो गये हैं। राज्यपाल ने बिहार सरकार को पत्र लिखा है-मेरे परमिशन के बगैर भ्रष्टाचार की जांच कैसे हो रही है। इसे तत्काल रोकिये। हम आपको बता दें कि बिहार के राज्यपाल ही विश्वविद्यालयों के प्रमुख यानि चांसलर होते हैं। बिहार के कई यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार के मामलों में राजभवन की संदिग्ध भूमिका पहले ही सामने आ चुकी है। चर्चा ये है कि नीतीश कुमार राज्यपाल के खिलाफ केंद्र के पास गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

विज्ञापन
WhatsApp Image 2023-01-25 at 10.13.33 PM
pervej akhtar siwan online
WhatsApp Image 2022-08-26 at 8.35.34 PM
WhatsApp Image 2022-09-15 at 8.17.37 PM

दरअसल बिहार के ज्यादातार यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार के कई काले कारनामे सामने आ चुके हैं. बिहार सरकार की स्पेशल विजलेंस यूनिट ने मगध विश्वविद्यालय के कुलपति के ठिकानों पर छापा मारा था तो करप्शन का कारखाना सामने आ गया था. कुलपति राजेंद्र प्रसाद के ठिकानों से करोड़ों की नगदी और संपत्ति के कागजात मिले थे. उनके पास से यूनिवर्सिटी में हुए भारी घपले के सबूत भी बरामद हुए थे. वहीं, अरबी फारसी यूनिवर्सिटी से लेकर दूसरे कई यूनिवर्सिटी में करप्शन के दर्जनों गंभीर मामले सामने आये थे. बिहार सरकार की स्पेशल विजलेंस यूनिट विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार की जांच करने में लगी है।

लेकिन करप्शन की इस जांच ने राजभवन को बेचैन कर दिया है. राजभवन ने कहा है कि विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार की जांच गलत है. ये यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर हमला है. राज्यपाल के प्रधान सचिव आर एल चोंगथू ने राजभवन की ओऱ से बिहार के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि राज्यपाल की अनुमति के बगैर यूनिवर्सिटी में किसी तरह का हस्तक्षेप करना पूरी तरह से गैरकानूनी है. फिर कैसे बिहार सरकार की स्पेशल विजलेंस यूनिट यूनिवर्सिटी से भ्रष्टाचार से संबंधित कागजात मांग रही है।

राज्यपाल के प्रधान सचिव द्वारा बिहार सरकार के मुख्य सचिव को भेजी गयी चिट्ठी बेहद दिलचस्प है. राजभवन कह रहा है कि करप्शन की जांच से विश्वविद्यालयों में भय का माहौल उत्पन्न हो गया है. पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर मानसिक दबाव पड़ रहा है. यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का माहौल खराब हो रहा है. बिहार के यूनिवर्सिटी स्वायत्त हैं औऱ जांच से उनकी स्वायत्तता पर कुठाराघात हो रहा है. राजभवन कह रहा है कि अगर जांच ही करनी है तो हमसे परमिशन लो. भ्रष्टाचार निरोधक कानून में भी ये उल्लेखित है कि राज्यपाल की मंजूरी से ही कोई भी जांच हो सकती है।

राज्यपाल के प्रधान सचिव के इस पत्र ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार के विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार को सीधे राजभवन का संरक्षण मिला हुआ है. पिछले दिनों हुए लगातार वाकये ऐसे गंभीर सवाल खड़ा कर रहे हैं. मगध यूनवर्सिटी के वीसी के ठिकानों पर छापे में बिहार सरकार की विशेष निगरानी इकाई ने करोड़ों की रकम औऱ भ्रष्टाचार का पूरा पिटारा खोल दिया था. पूरी यूनिवर्सिटी भ्रष्टाचार का अड्डा बन कर रह गयी थी. लेकिन राजभवन ने आरोपी कुलपति राजेंद्र प्रसाद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. बिहार सरकार ही नहीं बल्कि बीजेपी के सांसद सुशील मोदी तक ने राजभवन से मांग की थी कि आरोपी कुलपति के खिलाफ कार्रवाई हो लेकिन राज्यपाल ने वीसी राजेंद्र प्रसाद को दो दो दफे एक-एक महीने का मेडिकल लीव दे दिया. ताकि वे आराम से निगरानी विभाग से छिपे रह सके. इस बीच कुलपति जमानत के लिए कोर्ट पहुंच गये. हालांकि कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।