इंटर कॉलेज की मान्यता रद्द होने का कोई प्रभाव इस्लामिया कॉलेज पर नहीं:- गनी

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परवेज अख्तर/सीवान:- इंटर कॉलेज के मान्यताओं को रद्द करने संबंधी विज्ञप्ति में साजिश की बू आ रही है शिक्षा विभाग द्वारा इंटर कॉलेज के मान्यताओं को रद्द करने का कोई प्रभाव इस्लामिया कॉलेज के नहीं पड़ेगा ।इस संबंध में जेड ए इश्लामिया कालेज के शासी निकाय के सचिव जफर अहमद गनी ने एक प्रेस वार्ता कर बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा पिछले दिनों एक विज्ञप्ति प्रकाशित की गई थी और समाचार द्वारा इश्लामिया महाविद्यालय के मान्यता के संबंध मे एक भ्रामक खबर छपी थी। जिसे लेकर आज महाविद्यालय के छात्रों की एक बैठक की गई और गलतफहमी के संबंध में विस्तार से बताया गया। बैठक के बाद सभी छात्र संतुष्ट हुए। इस संबंध में शासी निकाय के सचिव जफर अहमद गनी ने बताया कि जेड ए इश्लामिया महाविद्यालय की स्थापना 1971 में की गई। उस समय बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का जन्म भी नहीं हुआ था। महाविद्यालय को कई बार अस्थाई संबंधन विभाग द्वारा प्राप्त हुआ। और लगातार 1972 से मिलता रहा अंत में बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा सरकार के तत्कालीन संयुक्त सचिव सदानंद सिंह द्वारा 17 दिसंबर 1986 को संस्था का स्थाई संबंधन प्राप्त हुआ। पुनः 6 मार्च 1991 को तत्कालीन संयुक्त सचिव बीपी चौधरी द्वारा कालेज को कला विज्ञान समेत सभी विषयों की स्थाई संबंधन दिया गया। इसी संबंधन को आधार मानके महाविद्यालय के शासी निकाय द्वारा विज्ञान संकाय में अतिरिक्त सेक्शन की मांग की गई ,तब बिहार इंटरमीडिएट कौंसिल के सचिव मथुरा चौधरी ने स्थाई रूप से दो सेक्शन की स्थाई स्वीकृति प्रदान की। बाद में वर्ष 2007 में इंटर काउंसिल के मांग पर ₹150000 शासी निकाय द्वारा इंटरमीडिएट काउंसिल मे जमा कराया गया। सचिन श्री गनी ने बताया कि वाणिज्य संकाय के मान्यता के मामले में सरकार द्वारा दूर निरीक्षण दल विद्यालय आए थे जिनके निरीक्षण के बाद स्थाई संबंधन की अनुशंसा भी की गई थी। उन्होंने बताया कि अनुशंसा के बाद वाणिज्य संकाय की मान्यता नहीं मिली तब मजबूरन शाषी निकाय को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान में वाद संख्या 1546/2008 धाम कराया गया तब आयोग के निर्देश पर बिहार सरकार के तत्कालीन सचिव अनूप कुमार सिन्हा ने शपथ पत्र में स्वीकार किया कि जेड ए इश्लामिया महाविद्यालय स्थाई संबंधन वाला महाविद्यालय है। ऐसे में समाचार पत्रों में शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित मान्यता संबंधी खबर भ्रामक है।

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