हत्याकांड के नामजद दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा

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परवेज अख्तर/सिवान : अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय अवधेश कुमार दुबे की अदालत ने मंगलवार को हत्याकांड से जुड़े मामले में दोषी पाए गए दो नामजद अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दी है। अभियोजन की ओर से बहस करने वाले अपर लोक अभियोजक रघुवर सिंह से मिली जानकारी के मुताबिक अदालत ने नामजद अभियुक्त जितेंद्र चौबे एवं पूर्व मुखिया मोगल राम को भादवि की धारा 302 के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं 20-20 हजार का आर्थिक दंड दिया है। अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में अभियुक्तों को 6 माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने भादवि की धारा 427 के अंतर्गत दोनों अभियुक्तों को तीन-तीन साल सश्रम कारावास एवं 10- 10 हजार का आर्थिक दंड दिया है। दोनों सजाएं साथ साथ चलेंगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दरौली थाना के गड़वार निवासी सुरेंद्र चौबे के खेत में लगी फसल को जितेंद्र चौबे की गाय प्रत्येक दिन चर जाया करती थी। जितेंद्र चौबे असामाजिक तत्वों के सदस्य थे और सुरेंद्र चौबे के फसल को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से अपनी गाय को उनकी खेत में छोड़ दिया करते थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच वाद-विवाद घटना के दो-तीन दिन पूर्व से चल रहा था। 29 अप्रैल 2010 को वाद विवाद बढ़ गया तथा जितेंद्र चौबे ने तत्कालीन मुखिया मोगल राम, मुकेश गोड़, बबलू राजभर के साथ सुरेंद्र चौबे के घर पर धावा बोल दिया। इसी बीच सुरेंद्र चौबे के चचेरा भाई नारायण चौबे भी बीच-बचाव के उद्देश्य से सुरेंद्र चौबे के दरवाजे पर पहुंच गए। गोलीबारी की घटना हुई तथा गोली लगने से नारायण चौबे की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। सुरेंद्र चौबे के बयान पर जितेंद्र चौबे एवं अन्य तीन अभियुक्तों के विरुद्ध दरौली थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले में सूचक की ओर से अधिवक्ता घनश्याम नाथ तिवारी, बैजनाथ सिंह तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वीपेंद्र वर्मा एवं अनिल कुमार तिवारी ने बहस किया।