बड़हरिया:- क्या मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण व भीतरघात से बदल पाएगी बड़हरिया का चुनावी फिज़ा ?

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बड़हरिया में अशरफ के दस्तक से त्रिकोणीय लड़ाई होने की है संभावना

परवेज़ अख्तर/सीवान:
बड़हरिया के वर्तमान विधायक श्री श्‍यामबहादुर सिंह अपनी रंगीन मिजाजी के लिए जाने जाते हैं। आए दिन उनके ठुमकों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना कोई हैरत की बात नहीं। आइए हम प्रकाश डालते हैं  सीवान के हॉट सीट बड़हरिया पर। यहां से श्री श्याम बहादुर सिंह ने गत विधानसभा चुनाव में लोजपा के प्रत्यासी श्री बच्चा जी पांडेय को पटखनी देकर इस सीट पर कब्जा जमाया है। इस बार जदयू एनडीए का हिस्सा है और लोजपा अपनी अलग प्रत्यासी यहां से अपना चुकी है। विधायक श्री श्याम बहादुर सिंह ने गत विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के श्री बच्चा जी पांडेय को करीब 14500 वोटों के अंतर से हराया था। हालांकि गत चुनाव में जदयू – महागठबंधन का हिस्सा था और लोजपा एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। महागठबंधन के राजद कोटे से इस विधानसभा क्षेत्र से श्री बच्चा जी पांडेय को उम्मीदवार बनाया गया है। यहां बतादूं कि बड़हरिया विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन के प्रत्याशी जो बीजेपी के चर्चित एमएलसी टुन्ना जी पांडेय के सगे भाई हैं।

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इधर राजद से बागी उम्मीदवार डॉक्टर अशरफ अली, अनिल कुमार गिरि, लोजपा से वीरबहादुर सिंह, रालोसपा से श्रीमती वंदना सिंह कुशवाहा, निर्दलीय रिजवान अहमद, मुजफ्फर इमाम, मंटू कुमार, उमेश कुमार सिंह, मुमताज अहमद, तौसिफ उर्फ बंटी सहित 15 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। फिलहाल हमेशा अपनी हरकतों से सुर्खियों में रहने वाले सूबे के मुखिया श्री नीतीश कुमार के करीबी और बड़हरिया विधानसभा से वर्तमान विधायक श्री श्याम बहादुर सिंह बिल्कुल देसी मिजाज के नेता हैं। बताया जाता है कि विधायक अपने क्षेत्र के लोगों से मिलने और बात करने से कभी रोकते नहीं हैं और हमेशा उन्हें अपने करीब रखने की कोशिश करते हैं। हालांकि उनकी चर्चा विवादित हरकतों के कारण ज्यादा होती है।बड़हरिया विधानसभा से दो बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले श्री श्याम बहादुर सिंह एक बार जीरादेई से भी विधायक रह चुके हैं। लेकिन इस चुनाव में श्यामबहादुर सिंह को बीजेपी के नेता अनिल कुमार गिरि अपने आप मे सुुमार होकर चुनाव लड़ रहें हैं जो एनडीए के वोटों को ही काट रहें हैं।

इसी तरह लोजपा के वीरबहादुर सिंह विधायक के स्वजातीय हैं.वहीं रालोसपा प्रत्याशी श्रीमती वंदना सिंह कुशवाहा कोइरी जाति से वास्ता रखती हैं।कोइरी जाती भी इस क्षेत्र में एनडीए के परंपरागत वोटर रहे हैं।लेकिन श्रीमती वंदना सिंह कुशवाहा के अपने स्वजातीय वोटरों पर अच्छी खासी पकड़ देखी जा रही है।जहां तक राजद उम्मीदवार श्री बच्चा जी पांडेय का सवाल है तो क्षेत्रों में उनपर पैसे के बल पर टिकट खरीदने, बड़हरिया विधानसभा के मूल निवासी नहीं होने का और सत्ता के लिए हमेशा दल बदलते रहने का आरोप क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों लग रहें हैं।आरजेडी के बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे निर्दलीय डॉक्टर अशरफ अली पेशे से चिकित्सक है।इनके व्यापक सामाजिक सरोकार रहे हैं।चाहे शुक्रवार का मुफ्त इलाज का मामला हो या मुफ्त चिकित्सा शिविर लगाकर जरुरतमंदों की सेवा का मामला हो।वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़हरिया में चिकित्सा पदाधिकारी के रुप में कार्यरत थे।साथ ही डॉ अशरफ अली निजी नर्सिंग होम चलाते रहे हैं।स्वास्थ सेवा में गरीबों को मदद के कारण क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता काफी है और इसी के बदौलत वे लोगों से वोट भी मांग रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रिजवान अहमद का कहना है कि सीवान जिले में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं और मुस्लिम आबादी होने के बावजूद यहां से एक भी मुस्लिम को आरजेडी से टिकट नहीं मिला।जिसके कारण लोगों में काफी नाराजगी है।उनका कहना है कि यहां से बाहरी उम्मीदवार को टिकट देकर पार्टी ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की है।वहीं निर्दलीय प्रत्याशी डॉ अशरफ अली का कहना है कि समर्थकों,शुभचिंतकों और कार्यकर्ताओं के दबाव में मैं चुनाव लड़ रहा हूं और मैं ही असली राजद उम्मीदवार हूं.उनका कहना है कि एक तरफ श्री श्याम बहादुर सिंह शराब पीने और डांस करने वाले में उम्मीदवार हैं तो दूसरी ओर श्री बच्चा जी पांडेय शराब बेचने वाले.डॉ अशरफ अली की मतदाताओं में छवि अच्छी है। कुल मिलाकर यहां 15 उम्मीदवार खड़े हैं। लेकिन मुख्य रूप से मुकाबला यहां एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार श्री श्याम बहादुर सिंह, निर्दलीय प्रत्याशी डॉ अशरफ अली और महागठबंधन के प्रत्याशी श्री बच्चा जी पांडे के बीच होने की संभावना नजर आ रही है।

सबसे गौर करने वाली बात तो यह हैै कि इस विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल माय समीकरण बिखरता हुआ स्पष्ट रूप से दिख रहा है।डॉ अशरफ अली के पक्ष में मुसलमानों में एक वर्ग के 70 प्रतिशत लोग खुले तौर पर दिख रहे है जबकि दूसरे वर्ग के लोग साइलेंट वोटर के मूड में हैं।अल्पसंख्यक समुदाय के  अधिकांश लोग फिलहाल स्थिति को भांप रहे हैं।यहां बतादूं कि इस विधानसभा क्षेत्र में अगर अल्पसंख्यकों के मत का विभाजन हुआ तो यहां महागठबंधन की नैया को पार लगाना केवट रूपी प्रत्याशी श्री बच्चा जी पांडे के लिए आसान साबित नहीं होगा।बहरहाल ये देखना दिलचस्प है कि इस चुनाव में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हो पाता है या नहीं,भीतरघात से किसको कितना फायदा और नुकसान होता है।यह भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है।