बसंतपुर: खेढ़वां माई स्थान पर पूजा-अर्चना को उमड़ा लोगों का हुजूम

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  • 1 लाख से अधिक लोगों ने देर शाम तक की पूजा
  • मेला शुरू होने से क्षेत्र के लोगों में भी काफी उत्साह

✍️परवेज़ अख्तर/एडिटर इन चीफ:
बसंतपुर थाना क्षेत्र व भगवानपुर हाट प्रखंड के खेढ़वां माई स्थान पर शुक्रवार की अहले सुबह राज्यस्तरीय मेले का शुभारंभ हुआ. इस दौरान माई स्थान पर पूजा-अर्चना को लेकर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. महिला-पुरुष, वृद्ध व बच्चे हर वर्ग के लोगों में एक अलग तरह का उत्साह दिखा. लोग स्थान पर पहुंच माई स्थान पर पिंडियों की पूजा-अर्चना करने को लेकर आतुर दिखे. देर शाम तक एक अनुमान के अनुसार एक लाख से भी अधिक लोगों ने पूजा की. इस दौरान खेढ़वां सहित आसपास का गांव माता के रंग में रंगा दिखा. हर तरफ सिर्फ पूजा की ही चर्चा में लोग व्यस्त दिखे. गांव के लोगों ने बताया कि लोग मेले का पूरे साल इंतजार करते हैं. पिछले दो सालों में कोरोना महामारी को लेकर मेला भी प्रभावित हुआ. हालांकि अब लोग पीछे की बातों को भूलते हुए पूजा-अर्चना के साथ ही मेले का आनंद लेने में व्यस्त दिखे.

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पर्याप्त पुलिस बलों की थी व्यवस्था

मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस लाइन से महिला-पुरुष बलों को बुला लिया गया था. बसंतपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार के नेतृत्व में मेले तक पहुंचने के अमूमन सभी मार्गों पर पुलिस बलों की व्यवस्था की गई थी. मेले में भीड़ के बीच पॉकेटमार व झपटमारों पर भी नजर के लिए पुलिस बल मेले में सक्रिय रहे. बने कैम्प में भी पुलिस बलों की तैनाती थी. मेले को लेकर शुक्रवार की अहले सुबह से ही बसंतपुर मुख्यालय के स्टेट हाइवे व महाराजगंज रोड में जाम की स्थिति रही. वाहनों से आगे निकलने के लिए लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ी.

मीना बाजार व मनोरंजन के साधनों के नजदीक दिखी भीड़

मेले में लगे मीना बाजार व मनोरंजन के आये कई साधनों के नजदीक लोगों की काफी भीड़ दिखी. पुलिस के अलावा मेला समिति के सदस्य भी काफी तत्पर दिखे. झूले के अलावा मौत का कुआं लोगों के आकर्षण के केन्द्र में रहा. इन जगहों पर हर उम्र वर्ग के लोग जुटे. कई लोगों ने झूले पर बैठ आनंद लिया. मौत के कुएं में वाहन चालक का स्टंट देख लोग अचंभित दिखे.

प्रशासनिक उपेक्षा का लोगों को मलाल

स्थानीय लोगों को इस बात का भी मलाल है कि इतने ख्याति के बावजूद आज तक इसे राजकीय मेला घोषित नहीं किया जा सका. पूर्व विधायक डॉ.देवरंजन सिंह व हेमनारायण साह ने ग्रामीणों को आश्वासन तो दिया. लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिखा. राजकीय मेला घोषित नहीं होने से मेले में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होना दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों को खटकता है. शौचालय तक की व्यवस्था नहीं होने से लोगों की फजीहत होती है. वहीं महिलाओं को ऐसी स्थिति में शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती है.