BJP अध्यक्ष ने कहा-विवादित बयान देने वाले विधायक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा….

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पटना: भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने अपनी पार्टी के बड़बोले विधायकों को चेताया है. उन्होंने कहा है कि भाजपा में संविधान विरोधी बातें स्वीकार नहीं की जाएंगी. जायसवाल ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि संविधान ने प्रत्येक भारतीय नागरिक को कई अधिकार दिए हैं, जिनमें ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ की गूंज आजकल सबसे अधिक सुनाई देती है. अभिव्यक्ति की आजादी यानी बोलने की स्वतंत्रता. स्वतंत्रता ताकत होती है, लेकिन ताकत के साथ जिम्मेवारियां भी साथ आती है. जिम्मेवारी के बिना ताकत को अराजकता में बदलने में देर नहीं लगती।

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दरअसल भाजपा विधायक हरिशंकर बचौल ने मुस्लिमों को लेकर कथित रूप से कहा था कि वे भारत में दोयम दर्जे के नागरिक बन कर रहें या पाकिस्‍तान जाएं मुस्लमान. उन्होंने मुस्लिमों के वोटिंग राइट भी खत्‍म करने की सरकार से गुहार लगाई थी. माना जा रहा है कि बचौल की टिप्पणी के बाद ही डॉ संजय जायसवाल ने अपनी पार्टी के नेताओं को सोच समझकर बोलने की हिदायत दी है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग संविधानप्रदत्त इस अधिकार का उपयोग के बजाए दुरुपयोग करने को ही अपनी श्रेष्ठता समझने लगे हैं. बोलने की आजादी की आड़ में बेलगाम बयान देना फैशन सा हो चला है. दुर्भाग्य से विपक्षी दलों द्वारा शुरू किये गये इस ट्रेंड के शिकार कुछ पक्षवाले भी हो गये हैं. इस स्थिति को विशेषकर भाजपा में ,किसी भी कीमत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर भारतवासी का अधिकार है, जिसे कोई छीन नहीं सकता. उसमें भी जब सत्ता में परिवारवादियों के बजाए मोदी सरकार हो तो यह बात नामुमकिन हो जाती है. जो सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास’ के मूलमंत्र पर काम कर रही हो, उसमें संविधान विरोधी कोई बात कहना खुद से अपनी बेइज्जती करवाने के बराबर है।

जायसवाल ने कहा कि जब आप जनप्रतिनिधि हों तो लोगों की आपसे अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं. संयम और शालीनता आपकी कथनी और करनी दोनों में झलकनी चाहिए. नहीं तो जिन ताकतों के विरोध में जनता ने आपको दायित्व दिया है, उनमें और आपमें कोई अंतर बांकि नहीं रह जाता. सच्चा राजनेता वही होता है जो जात, पात, धर्म, मजहब की उलझनों में खुद भी नहीं फंसता और समाज को भी इससे बाहर निकालने की क्षमता और मंशा दोनों रखता है।

जो सरकार देश के संसाधनों पर एक ख़ास समुदाय का पहला हक बताती थी, उसके दिन बीत चुके है कि बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने उनके हाथों से छीनकर अपार बहुमत के साथ मोदी सरकार के हाथों में देश की बागडोर सौंपी है. इसीलिए जनता और उनका कल्याण ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. भावावेश में भी किसी को भी अपने बयान से जनभावनाओं को आहत करने की छूट नहीं दी जा सकती. यह देश सभी का है और देश के हर नागरिक का इस पर बराबर का हक़ है. मोदी सरकार में लोगों का यह हक सौ प्रतिशत सुनिश्चित है इसीलिए लोगों की मोदी सरकार पर अगाध श्रद्धा है. अपने बयानों से मोदी सरकार और जनता के इस आपसी रिश्ते को कमज़ोर करने की चेष्टा कोई भी न करें।