डीएम-डीडीसी ने सुनी जल जीवन हरियाली परिचर्चा एवं संवाद

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वेबकास्टिंग के माध्यम से कलेक्ट्रेट एवं जिप सभागार में किया गया श्रवण आयोजन

परवेज अख्तर/सीवान:
जल जीवन हरियाली आधारित राज्यस्तरीय परिचर्चा को सुनने के लिए वेबकास्टिंग जीवंत प्रसारण की व्यवस्था कलेक्ट्रेट एवं जिला परिषद सभागार में की गई थी. जिलाधिकारी अमित कुमार पांडे ने कलेक्ट्रेट सभागार में परिचर्चा का श्रवण किया तो डीडीसी दीपक सिंह एवं एसडीएम रामबाबू बैठा ने जिला परिषद सभागार में जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों-कर्मियों के साथ जल जीवन हरियाली परिचर्चा एवं संवाद कार्यक्रम का श्रवण किया. जल जीवन हरियाली अभियान के तहत विभिन्न जिलों को धन का आवंटन कोरोना काल से पूर्व कर दिया गया था. राज्य में कुल 24 हजार करोड़ रुपये जल जीवन हरियाली को धरती पर उतारने के लिए खर्च करने की व्यवस्था की गई है. कोरोना महामारी ने इस अभियान पर ब्रेक लगा दिया और अब चुनाव के बाद जब सरकार दोबारा सत्ता में आई है तो इस अभियान को जमीन पर उतारने के लिए परिचर्चा संवाद के माध्यम से कर्मियों-अधिकारियों और आम नागरिकों को जोड़ने में जुट गई है.

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जिले में ग्रामीण विकास अभिकरण के माध्यम से पंचायतों-गांवों एवं नगर निकायों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में स्थित तालाबों-पोखरों-कुओं का जीर्णोद्धार करना है. सरकारी आदेश के आलोक में ग्रामीण विकास विभाग ने विभिन्न निकायों के कर्मियों को प्रशिक्षित करना प्रारंभ कर दिया है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पटना में हुई परिचर्चा- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास मंत्री एवं सचिव स्तरीय पदाधिकारियों के साथ जल जीवन हरियाली को जमीन पर उतारने में अहम किरदार निभा रहीं जीविका दीदियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए. इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य जन-जन को आम नागरिकों द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों के बारे में विस्तार से बताना है. परिचर्चा का आरंभ होने के बाद सबसे पहले जीविका दीदियों को ही अपने अनुभव साझा करने के लिए मंच प्रदान किया गया ताकि जनता तक यह संदेश जाए कि यह परिचर्चा केवल मुख्यमंत्री-मंत्री एवं अधिकारियों के भाषण सुनने के लिए नहीं है बल्कि जमीन पर कार्य कर रहे लोगों की बातें सुनी जाए.

राज्य के कोने-कोने से बुलाई गईं जीविका दीदियों के अनुभव अलग-अलग कहानियां कह रहे थे. मधुबनी से आई एक मछली विक्रेता जीविका दीदी ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उसके गांव का तालाब गर्मियों में सूख जाता था लेकिन परिवार और समाज का जागृत करके उसने उस तालाबा को नया जीवन दिया और आज वहां सालों भर पानी रहता है और सालों भर उसमें से मछलियां मारी जाती हैं. इससे उसका जीवन आसान हो गया क्योंकि मछली खरीदने के लिए उसे दूर दराज के गांवों में नहीं पड़ता. उसने बताया कि सरकार ऐसे तालाबों का जीर्णोद्धार करा देगी तो निश्चित रूप से लाखों लोगों को मछली पालन और बिक्री से रोजगार के अवसर सृजित हो जाएंगे. जहानाबाद से आई एक अन्य दीदी ने कहा कि हमारे यहां तो सितंबर में ही तालाब सूख जाते थे लेकिन सरकारी प्रयासों की बदौलत आज सालों भर पानी से भरे हुए हैं इससे उन किसानों एवं मछली पालकों को लाभ पहुंचा जिनके खेत इन तालाबों के किनारे थे या जो मछली का व्यवसाय करते थे.

पहले मछली बेचने वाले तीन माह ही मछली बेचते थे बाकी के दिनों में दूसरा कार्य करना पड़ता था. वेबकास्टिंग से हुआ प्रसारण- पटना में आयोजित जल जीवन हरियाली जनभागीदारी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हर जिले में किया गया जिसमें सीवान जिले में दो जगहों पर इसका प्रसारण किया गया. यह वेबकास्टिंग तकनीकी है जिसके माध्यम से पटना से जिला सीधे जुड़ जाता है. जिला ग्रामीण विकास अभिकरण सीवान, द्वारा विभिन्न विभागों के समन्वय से चलाए जा रहे जल जीवन हरियाली कार्यक्रम में शामिल दर्जनों विभागों के अलग-अलग कार्यों की रूपरेखा तैयार की जा रही है. हरेक विभाग के जिम्मे जल जीवन हरियाली को सफल बनाने के लिए टास्क सौंपे गए हैं जिसे वह अपने स्तर से पूरा कर रहा है. मत्स्य विभाग- तालाबों-पोखरों की नई खुदाई के मामले में मत्स्य विभाग का रिकार्ड अच्छा है.

मत्स्य विभाग द्वारा खुदवाए गए तालाबों-पोखरों से मछली पालन का व्यवसाय जिले में खूब फल फूल रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में 39 तालाबों की खुदाई पूरी हो चुकी है जबकि तीन तालाबों का खनन कार्य चल रहा है. इस तरह जिले में जल जीवन हरियाली के तहत मत्स्य विभाग द्वारा खुदवाए गए तालाबों की संख्या 42 हो जाएगी. इसके अलावा अन्य मदों से खुदवाए गए तालाबों से भी जल जीवन हरियाली को फायदा ही मिल रहा है. जल संसाधन विभाग- जल संसाधन विकास विभाग के तहत सिंचाई एवं कृषि विभागों को भी 66 फीट लंबे चौड़े तालाबों की खुदाई के लिए नई नीतियां लाई गई हैं. इससे उन किसानों को भी लाभ मिल सकेगा जिनके पास दो-चार कट्ठा जमीन में ही तालाब खुदवाने हैं या जिनके पास ज्यादा भूमि नहीं है. इन विभागों की रही सहभागिता- परिचर्चा व संवाद श्रवण कार्यक्रम में मत्स्य विभाग, जल संसाधन, खनन, सिंचाई, कृषि, सहकारिता, उद्यान, वन विभाग समेत कई अन्य विभागों के कर्मियों-पदाधिकारियों ने भाग लिया.