6 वर्ष भी कम पड़ रहे हैं सिवान पुलिस के लिए हत्यारा के गिरेबान तक पहुंचना

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  • गोली मारकर 65 वर्षीय चिमनी संचालक की कर दी गई थी हत्या
  • गांव में ही सब्जी खरीदने के दौरान अपराधियों ने दिया था घटना को अंजाम
  • हत्यारा बृजमोहन को आसमां निगल गई या धरती खा गई, इसका जवाब अब तक पुलिस की फाइलों में नहीं
  • घटना: एमएच नगर थाना क्षेत्र के पियाउर गांव का

परवेज अख्तर/एडिटर-इन-चीफ:
सुशासन सरकार के आला से आला अधिकारी अपने अपने आधिकारिक मीटिंग में जहां दर्ज कांड का अवलोकन करने के बाद अपने कड़े तेवर में अपने अपने कनीय पदाधिकारी को जल्द से जल्द दर्ज कांडों का निपटारा करने की नसीहत तो जरूर देते आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी सही समय पर दर्ज कांडों का डिस्पोजल नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते पीड़ितों को सही समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। और न्याय पाने के लिए परिजन पुलिस अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर ऐसे लगा रहे हैं कि जैसे मृगा के नाभि में कस्तूरी पाया जाता है और उस कस्तूरी को पाने के लिए मृगा जंगल में दर-दर भटक रहा हो।उपरोक्त तथ्यों के निचोड़ पर एक लोकोक्ति सटीक बैठ रही है कि “जब खुदा ही अपने रूठे हों तो दिल की जलन का क्या होगा और जब बाग का माली दुश्मन हो तो अहले चमन का क्या होगा”! मृदा आवाज चीख चीख कर उस हत्यारे को तलाश तो कर ही रही है लेकिन हत्यारे के गिरेबान तक पहुंचना सिवान पुलिस के लिए 6 वर्ष कम पड़ रहे हैं।

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यहां बताते चलें कि सारण प्रमंडल के सिवान जिला अंतर्गत एमएच नगर थाना क्षेत्र के पियाउर गांव निवासी सह चिमनी संचालक वसी अहमद (65 वर्ष) को गांव में हीं पैदल आए शातिर अपराधियों ने गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया था। उक्त घटना 21 जनवरी 2016 को करीब 7:30 बजे सुबह की है। घटना उस समय घटी की जब चिमनी संचालक वसी अहमद गांव में ही पैदल सब्जी खरीदने के लिए गए हुए थे। इस घटना को लेकर मृतक वसी अहमद के भतीजे अली अहमद के बयान पर थाना कांड संख्या 14/ 2016 दर्ज कराई गई थी। दर्ज प्राथमिकी में पियाउर पंचायत के मुखिया आश्मीन आरा के पति अबरे आलम पिता गफ्फार मियां, जाहिद मियां पिता शमीम मियां, टुनटुन साह पिता बैजनाथ साह, विजय शर्मा पिता राम जी शर्मा, बृजमोहन सिंह पिता अर्जुन सिंह सभी ग्राम पियाउर थाना एमएच नगर जिला सिवान को आरोपित किया गया था।

घटना के बाद पुलिस की सक्रियता इतनी दिखी कि दर्ज कांड के पांच नामजद आरोपितों में से चार को जेल की हवा खानी पड़ी। लेकिन बाद में इस घटना को लेकर पुलिस इतना निष्क्रिय हुई कि आज 6 वर्षों बाद भी दर्ज कांड के एक नामजद आरोपी बृजमोहन सिंह को अब तक पुलिस तलाश नहीं कर पाई है। पता न हत्यारा बृजमोहन सिंह को धरती खा गई या आसमां निगल गया ! इसके बारे में न तो स्थानीय थाने को कुछ पता है और न हीं सिवान पुलिस के आला अधिकारी को इसके बारे में पुष्ट जानकारी है। हालांकि स्थानीय पुलिस द्वारा आला अधिकारी के जवाब के लिए एक सहज उपाय ढूंढ कर रखा गया है कि आरोपित बृजमोहन सिंह के फिरार रहने की स्थिति में माननीय न्यायालय के आदेश पर कुर्की जप्ति का तामिला कर स्थाई वारंट रखा गया है। इस संबंध में एमएच नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि घटना के बाद से बृजमोहन सिंह आज तक अपने गांव में दिखाई नहीं दिया हालांकि माननीय न्यायालय के आदेश के आलोक में कुर्की जब्ती का तमिला भी कर दिया गया है।

मृतक वसी अहमद के कांड के सूचक की भी गोली मारकर कर दी गई है हत्या:

चिमनी संचालक मृतक वसी अहमद की निर्मम हत्या के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने वाले दर्ज कांड के सूचक सह मृतक का भतीजे अली अहमद को भी शातिर अपराधियों ने गांव स्थित चिमनी पर 27 जून 2019 को 4 बजे शाम में बाइक तथा स्कार्पियो सवार अपराधियों ने गोली मारकर निर्मम हत्या कर डाली थी। जहां मौके वारदात पर उनकी मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर मृतक अली अहमद के छोटे भाई अफरोज अहमद पिता नबी अहमद के लिखित आवेदन पर थाना कांड संख्या 190/19 दर्ज कराई गई थी। दर्ज प्राथमिकी में मुखिया पति अबरे आलम पिता गफ्फार मियां, फारुख मियां पिता मुस्लिम मियां, कौसर साई पिता अंसार साई तथा गांव के ही एक डीलर अनवार आलम पिता वासिल मियां को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। यहां बताते चले कि पुलिस इस कांड को भी अब तक डिस्पोजल नहीं कर पाई है। एमएच नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि सिवान के वरीय पुलिस पदाधिकारी ने अपने सुपरविजन के दौरान 190/19 के नामजद आरोपी सह डीलर अनवार आलम का नाम निकाल चुकी है। लेकिन डीआईजी सारण के पर्यवेक्षण टिप्पणी के चलते मामला लंबित है।

हत्यारा बृजमोहन सिंह की गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों में 6 वर्षों से है दहशत कायम:

चिमनी संचालक वसी अहमद के हत्याकांड में संलिप्त बृजमोहन सिंह के 6 वर्ष बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने से परिजन खौफजदा की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। परिजनों का कहना है कि हम सभी लगातार कई वर्षों से सिवान पुलिस के आला अधिकारी का दरवाजा खटखटा कर हार थाक गए। परंतु पुलिस के कानों तक जूं नहीं रेंग सकी। जिसके चलते हम सभी लोग आज तक खौफजदा की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।