हरतालिका तीज : हर साल मै करूं तीज ओ सांवरिया, साजन लगे तुझे मेरी भी उमरिया………

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पति की सलामती को ले सुहागिनों ने किया तीज, निराजल रह की शिव-पार्वती की उपासना

व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को मिलता है उनके पति का सात जन्मों तक साथ

मंदिरों में हरतालिका व्रत कथा सुनने को उमड़ी सुहागिन महिलाओं की भीड़

माता पार्वती को अर्पित की गई सुहाग सामग्री

परवेज़ अख्तर/सिवान:- पति की लंबी आयु एवं सौभाग्य वृद्धि के लिये किया जाने वाला हरतालिका व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतिया तिथि को माता गौरी और भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना के साथ रखा जाता है। जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को बुधवार को हरतालिका व्रत (तीज) की धूम रही। सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर पति के दीर्घायु एवं सुखमय जीवन के लिए भगवान शिव-पार्वती की आराधना की। सोमवार पूरे दिन निर्जला व्रत रहकर अल सुबह महिलाओं ने सरगही की रस्म अदा की। इस दौरान हल्का खाद्य एवं पेय पदार्थ ग्रहण किया। इसके बाद स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण एवं शृंगार कर पूजन सामग्री के साथ मंदिरों में पहुंची। निर्जल व्रत रखकर पूजा-अर्चना का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। जहां शाम को भी मंदिरों में पूजा के लिए भीड़ उमड़ी रही। अल-सुबह घरों की विधिवत साफ-सफाई की गई और गीत-संगीत का आयोजन किया गया। सुहागिन महिलाओं ने हाथ पर सुहाग के नाम की मेंहंदी रचाई और शिव मंदिर में देवी पार्वती से सुखद दांपत्य जीवन के निमित्त प्रार्थना की तथा आचार्यों से हरतालिका व्रत की कथा सुनी। कई स्थानों पर सामूहिक पूजा फुलेरा की स्थापना की गई। इस दौरान गीली मिट्टी, बेलपत्र, शम्मी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल और फूल, कुमकुम, दीपक के साथ पूजा की और मां पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित किया। महिलाओं की उपस्थिति के अनुसार मंदिरों में कई बार आचार्यों द्वारा तीज व्रत का सामूहिक कथा वाचन किया गया। इसके अलावा कई जगहों पर महिलाएं घर में ही आचार्यों को बुलाकर उनसे कथा सुनी। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। सोमवार को पूरे दिन-रात निराजल रहने के बाद सुहागिनें मंगलवार की अल सुबह पूजा-अर्चना तथा दान-पुण्य करने के बाद पारण करेंगी। आचार्य विरेंद्र पांडेय ने बताया कि मान्यता के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए जंगल में जाकर कर हजारों साल तक कठोर तपस्या की थी। तब जाकर उन्हें भोले बाबा मिले थे। इस दिन सुहागिनों को गणेश,पार्वती और भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत को तपस्या और निष्ठा के साथ स्त्रियां रखती है। यह व्रत बड़ा कठिन है क्योंकि ये व्रत बिना पानी के रखा जाता है। इस व्रत का खास तौर पर उत्तर भारत में विशेष महत्व है। कहते हैं इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को उनके पति का साथ सात जन्मों तक मिलता है। इस दौरान जिला मुख्यालय के कचहरी रोड स्थित राधाकृष्ण मंदिर, महादेवा शिव मंदिर, बुढ़िया माई मंदिर, फतेहपुर, स्टेशन रोड, श्रीनगर, शास्त्री नगर, शुक्ल टोली हनुमान मंदिर, ठाकुरबाड़ी समेत अन्य मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ी रही। इसके अलावा महाराजगंज, दारौंदा, पचरुखी, आंदर, तरवारा, लकड़ी नबीगंज, बसंतपुर, भगवानपुर, सिसवन, मैरवा, दरौली, जीरादेई, गुठनी, रघुनाथपुर, गोरेयाकोठी, नौतन समेत अन्य प्रखंडों में भी तीज की कथा सुनी गई। व्रती भगवानुपर की मीरा देवी कहती हैं कि भगवान शिव एवं माता पार्वती पर अटूट विश्वास है कि उनका सुहाग अक्षय रहेगा।

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