जिले में शीतलहर का बढ़ा प्रकोप, धुंध का करना पड़ रहा है सामना

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  • सुबह में घने कोहरे के कारण दोपहिया वाहन चालकों को कहीं आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है
  • शीतलहर की वजह से जनजीवन हो रहा काफी प्रभावित
  • शहर से लेकर गांव तक ठंड का काफी असर दिख रहा है
  • 07 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया का न्यूनतम तापमान

परवेज अख्तर/सिवान: जिले में शीतलहर का प्रकोप काफी बढ़ गया है। इससे आम जनजीवन काफी प्रभावित हो रहा है। शाम ढलते ही घनघोर कुहासा के कारण अंधेरा छा जा रहा है। दिन में भी धुंध के बने रहने के कारण चालक वाहनों को धीमी गति से चलाने को विवश हैं। गुरूवार की सुबह में घने कोहरे के कारण दोपहिया वाहन चालकों को कहीं आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वाहन चालकों को हेड लाइटें जला कर धीमी गति से सतर्कता के साथ ही आगे बढ़ना पड़ा। कड़ाके की पड़ रही ठंड की वजह से आम जन अलाव जलाकर सर्दी से राहत पाने की कोशिश में जुटे थे। मकर संक्रांति के बाद मौसम अचानक से करवट ले लिया है। इस वजह से लोगों को गर्म कपड़ों में रहना पड़ रहा है। ज्यादा ठंड होने से एकबार फिर बाजार से ऊनी कपड़ों की बिक्री बढ़ गयी है। शहर से लेकर गांव तक ठंड का असर दिख रहा है। पिछले 6 दिनों से बढ़े हुए ठंड के कारण बच्चे-बूढ़े सभी परेशान हैं। परिवार के लोग भी इनपर विशेष रूप से ध्यान दे रहे हैं। प्रशासनिक स्तर से हाट-बाजारों में अलाव की व्यवस्था नहीं होने से दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेला-खमोचे और फुटपाथी दुकानदारों को भी काफी परेशानी हो रही है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि मंडी में उनसे प्रतिदिन दुकान लगाने की चार्ज तो वसूला जा रहा है। लेकिन, अलाव की व्यवस्था नहीं की जा रही है।

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ठंड से हाट-बाजारों में कम दिख रहे लोग

ठंड बढ़ने की वजह से बाजारों में आम दिनों की अपेक्षा कम लोग दिख रहे हैं। हालांकि, गर्म कपड़ों की दुकान में लोगों को गर्म कपड़े खरीदते जरूर देखें जा सकते हैं। इलेक्ट्रिक सामान की दुकानों पर हॉट बॉक्स की भी बिक्री खूब हो रही है। मवेशियों पर भी इस ठंड का असर दिख रहा है। दुधारू पशु बहुत कम दुध दे रहे हैं। पशुपालक इन्हें ठंड से बचाने के लिए जूट के बोरे का चट्ट ओढ़ा रहे हैं। मवेशियों को सुखा चारा ही दिया जा रहा है। ठंड का असर खेती किसानी पर भी दिख रहा है। किसान इसे लेकर काफी परेशान हैं। कार्यालय कर्मियों को भी इस ठंड में काम करने में भारी कठिनाईयों को सामना करना पड़ रहा है।