सिवान शहर की साफ-सफाई में प्रतिमाह आने वाले खर्च का मांगा ब्योरा

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परवेज़ अख्तर/सिवान: नगर परिषद में वित्तीय वर्ष 2017 से डीजल घोटाले के आरोप मामले में डीएम ने सख्त कदम उठाते हुए मामले की सुनवाई को लेकर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं। मामले में पूर्व वार्ड पार्षद सह आरटीआइ कार्यकर्ता इंतखाब अहमद ने डीएम को आवेदन देकर प्रत्येक माह डीजल के नाम पर फर्जी वाउचर से लगभग आठ लाख रुपये की निकासी कर विभाग को राजस्व की क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया था।उन्होंने बताया है कि नगर परिषद में डोर-टू-डोर कचड़ा संग्रहण और लगभग 20 प्वाइंट कचरा का उठाव एनजीओ द्वारा किया जाता है। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2017 से डीजल घोटाले का खेल चल रहा है। पार्षदों द्वारा कई बार इसकी जांच को लेकर मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।सफाई कार्य को ले लगभग 40 टीपर/ट्रैक्टर/जेसीबी/ इत्यादि में डीजल का खर्च दिखाया जाता है।

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इसके साथ ही खराब पड़ी कई गाड़ियों के नाम पर भी डीजल का उठाव कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इनमें से अधिकांश गाड़ियों का ना तो रजिस्ट्रेशन ही है और ना ही इंश्योरेंस कराया गया है।उन्होंने बताया है कि नगर द्वारा अंगौता में खरीदी गई भूमि पर कूड़ा का निस्तारण कराने के लिए डीजल दी जाती है, जबकि कूड़े को शहर में सड़क के किनारे जहां तहां डंप कर दिया जाता है। इस संबंध में मामले की जांच करते हुए जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विपिन कुमार राय ने शनिवार को प्रधान सहायक से कूड़ा उठाने वाले वाहनों पर कितनी राशि खर्च की जाती है। समेत कूड़े का उठाव कहां-कहां से होता है और कहां उसको डंप किया जाता है।तथा कितनी गाड़ियां प्रयोग में लाई जाती है, इसकी रिपोर्ट मांगी है। साथ ही साथ 2019-20 का खर्च का पूरा ब्योरा भी मांगा है।