सिसवन: स्वाभिमान व त्याग की प्रतिमूर्ति थे महाराणा प्रताप

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  • पुण्यतिथि पर याद किए गए वीर महाराणा प्रताप
  • महाराणा ने स्वाभिमान से नहीं किया था समझौता

परवेज अख्तर/सिवान: जिले के सिसवन प्रखंड के गंगपुर सिसवन में बुधवार को महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई गई। महाराणा प्रताप की आदमकद प्रतिमा पर फूल माला पहना कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रतिमा के संस्थापक व नयागांव पंचायत के पूर्व मुखिया आनंद सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप त्याग व स्वभिमान की प्रतिमूर्ति थे। भारत के शौर्य के प्रतीक महाराणा प्रताप भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए कभी भी नहीं झुके। उन्होंने कभी भी अधीनता स्वीकार नहीं की। भारत के कई राजाओं ने अकबर की गुलामी करना मुनासिब समझा, पर महाराणा प्रताप जंगलों में भटकते रह गए, कंदमूल फल खाए, कई त्रासदी झेली लेकिन वे कभी भी किसी कीमत पर दुश्मनों के आगे नहीं झुके। यहीं वजह रही कि वियतनाम के प्रधानमंत्री भी जब भारत आए तो सबसे पहले महाराणा प्रताप के स्मारक पर गए और उन्हें नमन किया। ऐसे योद्धा के कारण ही आज भारत की पवित्रता टिकी हुई है।

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कहानी से बहुत कुछ सीखा

नन्दामुड़ा में सांसद कविता सिंह के आवास पर महाराणा प्रताप की 425 वीं पुण्यतिथि मनाई गई। उन्होंने कहा कि भारत माता को संपूर्ण न्योछावर करने वाले महाराणा प्रताप की कहानी से हमने बहुत कुछ सीखा है। अगर महाराणा प्रताप की जीवनी को अपने जीवन में उतारा जाय तो निश्चित रूप से हर घर के आंगन में भारत माता की पवित्रता के लिए महाराणा प्रताप का जन्म होगा। महाराणा प्रताप भले ही मेवाड़ में जन्मे, परंतु पूरा देश उनको नमन करता है। उन्होंने मातृभूमि के शीश को कभी झुकने नहीं दिया। मौके पर जदयू नेता अजय सिंह, प्रमुख धर्मेन्द्र साह, विनोद सिंह, कन्हैया सिंह, सत्येन्द्र भारती, अखिलेश सिंह, बबलू सिंह, रंजय सिंह, त्रिलोकीनाथ सिंह, ओमप्रकाश सिंह व देवेंद्र सिंह थे।