सिवान: शिकायत सुन मुख्यमंत्री ने टेक इमेडियट एक्शन लेने को कहा

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  • सीएम के जनता दरबार में सीवान पुलिस की शिकायत पहुंची
  • शराब माफियाओं की लिस्ट को लीक करने की दी जानकारी

परवेज अख्तर/सिवान: सीएम के जनता दरबार में सीवान पुलिस की शिकायत पहुंची, जिसे सुन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। फिर क्या था, उन्होंने डीजीपी एसके सिंघल को फोन लगा टेक इमेडियट एक्शन लेने को कहा। असल में मुख्यमंत्री तब गुस्सा हो गए जब उनके शराबबंदी अभियान में तहत सहयोग करने वाले सिसवन के नवलपुर के बीजेपी नेता गौतम यादव को माफियाओं ने जान से मारने की धमकी दे डाली। सोमवार को सीएम के जनता दरबार में फरियादी बनकर गए गौतम यादव ने शराब कारोबार के पीछे पुलिस की मिलीभगत का मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमाण प्रस्तुत किया। पूरी कहानी बताते हुए गौतम यादव ने मुख्यमंत्री से कहा कि 18 नवम्बर को उन्होंने एसपी अभिनव कुमार से मिलकर सिसवन इलाके के सात शराब माफियाओं की लिस्ट थमाई थी। एसपी ने आवेदन के रूप में सूचना मांगते हुए गोपनीयता बरतने की का आश्वासन देते हुए तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। लेकिन, एसपी को दिया गया आवेदन सिसवन पुलिस ने शराब माफियाओं को दे दी, जिसके बाद माफियाओं की ओर से गौतम यादव को जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। गौतम यादव ने वह आवदेन भी सीएम को दिखाया जिसपर एसपी ने थानेदार को एक्शन लेने का आदेश लिखा था। जनता दरबार से लौटने के बाद गौतम यादव ने बताया कि शराब माफियाओं के धमकी की शिकायत एसपी से की गई थी। इसके बाद उन्होंने जनता दरबार में जाकर सिसवन पुलिस की पोल खोली है।

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माफियाओं से संपर्क साध शुरू कर दी वसूली

बीजेपी नेता गौतम यादव ने बताया कि एसपी ने उसके दिए गए आवेदन पर कार्रवाई करने को लिखते हुए थानेदार कुमार वैभव को भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने आवेदन में शामिल सभी माफियाओं से संपर्क साध वसूली शुरू कर दी। माफियाओं के सरगना ने जब पुलिस को रुपए देने से इंकार करते हुए पहले सबूत देने को कहा तो उसने एसपी द्धारा भेजे गए उसके आवेदन को दिखाते हुए तस्वीर खींच लेने को कहा। इसके बाद शराब माफियाओं ने शिकायतकर्ता को धमकी देना शुरू कर दिया। उसने सीएम से बताया कि शिकायत करने के कारण ही पुलिस उसे तंग-तबाह कर रही है। ऐसे में उसे सभी नहीं छोड़ेंगे।

सराय ओपी में रहते सस्पेंड हुआ था थानेदार

सिसवन के थानेदार कुमार वैभव इससे पहले सराय के थानेदार थे, जिसे तत्कालीन डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने लचर पुलिसिंग व्यवस्था के आरोप में सस्पेंड किया था। इसके कुछ दिनों बाद रिलीज करते हुए उसे सिसवन की कमान सौंपी गई। वहां भी उसकी कार्यशैली को लेकर एसपी से कई लोगों ने शिकायत की थी, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए फटकार भी लगाई गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गौतम यादव का मामला सीएम के जनता दरबार में पहुंचने से थानेदार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आने वाले एक दो दिनों के भीतर पुलिस के वरीय अफसरों ने कार्रवाई करने का संकेत दिया है।

क्या कहते हैं डीआईजी

सारण रेंज के डीआईजी रवींद्र कुमार ने बताया कि इस मामले में अभी वरीय पदाधिकारी की तरफ से लिखित निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। निर्देश आते ही जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।