सिवान: दो माह में हुआ 90 पोस्टमार्टम, एक दर्जन की रिपोर्ट नहीं लेकर गए अनुसंधानकर्ता

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स्वजनों की सक्रियता में कमी के कारण दोषियों को सजा मिलने में आती है परेशानी

परवेज अख्तर/सिवान: वैसे आपराधिक मामले जिनमें किसी की जान चली जाती है उन मामलों में दोषियों को सजा तक पहुंचाने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अहम भूमिका होती है। इन्हीं रिपोर्ट से पुलिस चार्जशीट का आधार भी बनाती है। जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में अगस्त में 40 एवं सितंबर में 50 पोस्टमार्टम हुआ है। इनमें अधिकांश अनुसंधानकर्ता पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेकर चले गए हैं लेकिन अभी भी करीब एक दर्जन अनुसंधानकर्ता पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेकर नहीं गए हैं। इस कारण जांच अधूरी है। बता दें कि किसी भी व्यक्ति की अस्वभाविक मृत्यु के उपरांत मौत के कारण का पता लगने के साथ ही वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर दोषी को सजा दिलाने के अलावा दुर्घटना के कारण मौत की स्थिति में मुआवजे के लिए शव के पोस्टमार्टम कराने की जरूरत पड़ती है , लेकिन जिले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की स्थिति यह है कि इनके बारे में मृत व्यक्तियों के स्वजन सक्रिय नहीं हैं और जब पुलिस स्वजनों की सक्रियता में कमी देखती है तो वह भी सुस्त पड़ जाती है। समय पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने से केस में छेड़छाड़ की भी संभावना रहती है, जिसका लाभ आरोपित पक्ष को मिलता है।

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केस स्टडी 1

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बलेथा निवासी पंकज कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना में मेरी मां लगनी देवी की मौत एक मार्च 22 को बड़हरिया थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर में हो गई थी। जिसकी प्राथमिकी अज्ञात पर हुई थी। मुआवजा के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जरूरत है। मैं केस के अनुसंधानकर्ता के पास गया तो उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ले लिया हूं, आप सदर अस्पताल जाकर ले लीजिए। सदर अस्पताल गया तो पता चल कि अनुसंधानकर्ता रिपोर्ट लेकर नहीं गए हुए हैं। मुझे रिपोर्ट देने से इन्कार कर दिया गया। मैं थाना पर गया वहां से एक चौकीदार को भेजा गया लेकिन उनके कहने के बाद भी रिपोर्ट मुझे नहीं मिली। इस कारण मैं अभी तक मुआवजा के लिए आवेदन नहीं कर सका हूं।

केस स्टडी 2

एक सितंबर को बनकटा थाना क्षेत्र के भाटवलिया पांडेय के भीम प्रसाद की पुत्री अंशु कुमारी का शव मैरवा थाना क्षेत्र के बड़कागांव के निकट रेलवे ट्रैक के किनारे मिला था। मृतका अंशु की मां मुन्नी देवी ने बनकटा थाना में प्राथमिक कराई थी। उन्होंने बेटी की हत्या करने का आरोप लगा नामजद प्राथमिकी कराई। मैरवा थाने की पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए सदर अस्पताल भेज दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में विलंब के कारण अनुसंधान आगे नहीं बढ़ रही थी। मृतका अंशु की मां मुन्नी देवी ने बताया कि 20 दोनों तक चक्कर काटने के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध हो सकी। इसके बाद पुलिस ने अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी शुरू की ।

कहते हैं सिविल सर्जन

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई दूरी नहीं होती है। पोस्टमार्टम होने के बाद डाक्टर द्वारा रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। कम समय में रिपोर्ट अनुसंधानकर्ता को दे दी जाती है।

डा. अनिल कुमार भट्ट

सिविल सर्जन, सिवान