सिवान: डायरिया से होने वाले मृत्यु को शून्य  स्तर पर लाना सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य: सिविल सर्जन

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  • परिवार के सदस्यों को ओआरएस घोल बनाने की विधि बतायेंगी आशा कार्यकर्ता
  • डायरिया होने पर जिंक व ओआरएस का घोल का करें इस्तेमाल
  • 29 जुलाई तक चलेगा सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा

सिवान: जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चल रहा है जो 29 तक चलेगा. सिविल सर्जन डॉ. यदुवंश कुमार शर्मा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के सुरक्षात्मक उपायों को अनुपालन करते हुए वर्ष 2021 में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा कार्यक्रम का आयोजन 29 जुलाई तक किया जाना है. सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का उद्देश्य जिले में दस्त के कारण होने वाले शिशु मृत्यु का शून्य  स्तर प्राप्त करना है. डायरिया से होने वाले मृत्यु का मुख्य कारण निर्जलीकरण के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होना है. ओआरएस एवं जिंक के प्रयोग द्वारा डायरिया से होने वाली मृत्यु को टाला जा सकता है. सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान अंतर्विभागीय समन्वय द्वारा दस्त की  रोकथाम के उपायों, दस्त होने पर ओ. आर. एस. जिंक के प्रयोग, दस्त के दौरान उचित पोषण तथा समुचित इलाज के पहलुओं पर क्रियान्वयन किया जाना है.

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जिंक का प्रयोग करने से दस्त की तीव्रता में आती है कमी

सिविल सर्जन डॉ. यदुवंश कुमार शर्मा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य  परिवार के सदस्यों के समक्ष ओ.आर. एस. घोल बनाना एवं इसके उपयोग की विधि, इससे होने वाले लाभ को बताना, साफ-सफाई, हाथ धोने के तरीके आदि की जानकारी प्रदान करना. इसके साथ ही परिवार को परामर्श देगी कि जिंक का उपयोग दस्त होने के दौरान बच्चों को आवश्यक रूप से कराया जाये. दस्त बन्द हो जाने के उपरांत भी जिंक की खुराक 02 माह से 05 वर्ष तक के बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कुल 14 दिनों तक जारी रखा जाए. 02 माह से 06 माह तक आधी गोली (10mg) एवं 07वें माह से 05 वर्ष तक एक गोली (20mg)। जिंक का प्रयोग करने से दस्त की तीव्रता में कमी आ जाती है एवं अगले 02 से 03 महीने तक दस्त होने की संभावना कम हो जाती है.

अति-संवेदनशील व झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों पर विशेष फोकस

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय ने कहा कि अभियान के दौरान अति संवेदनशील क्षेत्र शहरी झुग्गी-झोपडी, कठिन पहुँच वाले क्षेत्र बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नोमैडिक, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवार ईंट भट्ठे पाले क्षेत्र अनाथालय तथा ऐसा चिह्नित क्षेत्र जहां दो-तीन वर्ष पूर्व तक दस्त के मामले अधिक संख्या में पाये गये हों वहां पर विशेष फोकस किया जायेगा. छोटे गांव, टोला, बस्ती, छोटे कस्बे जहां साफ-सफाई, साफ पानी की आपूर्ति एवं स्वास्थ्य अनुपालन किया जाना सुनिश्चित करें.

परिवार के सदस्यों की होगी काउंसिलिंग

आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा क्षेत्र भ्रमण के दौरान परिवार के सदस्यों के समक्ष ओआरएस घोल बनाना एवं इसके उपयोग की विधि, इससे होने वाले लाभ को बताना, साफ-सफाई, हाथ धोने के तरीके की जानकारी दी जायेगी. इसके साथ हीं परिवार को इन बिन्दुओं पर परामर्श दी जायेगी.